दलीप ने ‘आंसुओं पाकी बागोदी’ और अर्चना ने ‘मेरी आंखी रे घेरे’ गीत
से बांधा समांनाहन में पहाड़ी लोक बोली की कविताएं और लोकगीतों पर गोष्ठी
दीपचंद कौशल मुख्यातिथि, शायर नासिर यूसुफजई रहे विशिष्ट अतिथि
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। हिमजनमंच संस्था ने शाही मिष्ठान भंडार नाहन में पहाड़ी लोक बोली की कविताएं और लोकगीतों पर गोष्ठी आयोजित की। इसमें 20 कवियों, गायकों और लेखकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में कवि दीपचंद कौशल ने मुख्यातिथि और शायर नासिर यूसुफजई ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।
सबसे पहले संस्था के अध्यक्ष केएस नेगी ने कार्यक्रम में आए सभी लोगों का स्वागत किया। इसके बाद दीपराज विश्वास ने नशे दी बचाओ जान.., पहाड़ी कविता और गुमान सिंह ने साक्षरता पर कविता पढ़ी। अर्चना शर्मा ने मेरी आंखी रे घेरे, मेरी बहिणा ना मिटदे.., दलीप वशिष्ठ ने पारंपरिक लोक गीत आंसुओं पाकी बागोदी गीत सुनाया और समीक्षा में भाग लिया।
डाॅ.आईडी राही ने केली रीछो बागो दी डोरू और अनिल शर्मा ने नौवे फैशनो नौवे डिजाइनों.., गीत सुनाया। दीपचंद कौशल ने पारंपरिक साक्षरता गीत प्रस्तुत किया। अंत में शायर नासिर यूसुफजई ने गजल और महिया पेश करके समां बांधा।
कार्यक्रम के दौरान कमालचंद, रवि शर्मा, विशाल कश्यप और मनीष कुमार ने लोक गीत सुनाए। केएस नेगी ने बताया कि दिसंबर के अंतिम सप्ताह में लदयाणा जौनसारी उत्सव भी आयोजित किया जाएगा। संवाद