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हिमाचल: फिल्मों से पढ़ाई का नया मॉडल, केंद्र सरकार को भेजा प्रस्ताव; डॉ. संजीव अत्री ने तैयार की डिक्शनरी

Fri, 13 Feb 2026 11:18 AM IST
अंकेश डोगरा धर्म सिंह तोमर, नाहन (सिरमौर)।

सार

हिमाचल प्रदेश के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य व शिक्षाविद डॉ. संजीव अत्री ने भारत में सिनेमा को शिक्षा का प्रभावी माध्यम बनाने की दिशा में एक नया शैक्षिक मॉडल तैयार किया गया है। 
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डॉ. संजीव अत्री - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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भारत में सिनेमा को शिक्षा का प्रभावी माध्यम बनाने की दिशा में एक नया शैक्षिक मॉडल तैयार किया गया है। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य व शिक्षाविद डॉ. संजीव अत्री ने सिनेमा आधारित शिक्षण मॉडल विकसित कर इसे लागू करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। इस मॉडल के तहत कक्षा शिक्षण में विषयों को समझाने के लिए चयनित फिल्म दृश्यों का उपयोग किया जाएगा। डॉ. अत्री ने अपने अध्ययन में तीन वर्षों के दौरान 12,824 व्यावसायिक भारतीय फिल्मों का गहन विश्लेषण किया। अध्ययन के बाद उन्होंने 2,850 ऐसे प्रभावशाली फिल्म दृश्य चिह्नित किए, जिन्हें कक्षा शिक्षण में प्रयोग किया जा सकता है। इन सभी दृश्यों को विषय, अध्याय और शैक्षिक उद्देश्य के अनुसार वर्गीकृत कर एक सिनेमा सीन डिक्शनरी तैयार की गई है।

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डॉ. अत्री का कहना है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह समाज, संस्कृति, विज्ञान, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को समझाने का सशक्त माध्यम है। सिनेमा की दृश्यात्मक और मनोवैज्ञानिक शक्ति विद्यार्थियों के मन पर गहरा प्रभाव डालती है। यदि इसी शक्ति को शिक्षा से जोड़ा जाए, तो पढ़ाई को अधिक रोचक और प्रभावी बनाया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि आज के बच्चे फिल्मों और मोबाइल चैनलों के माध्यम से बहुत कुछ सीखते हैं। यदि फिल्मों से विषयों से जुड़ी सामग्री को अलग कर पाठ्यक्रम से जोड़ा जाए, तो यह शिक्षण का एक कारगर तरीका साबित हो सकता है। इस मॉडल में हर सिनेमा स्क्रीन को कक्षा का ब्लैकबोर्ड और हर अर्थपूर्ण फिल्म दृश्य को पूरा पाठ माना गया है।

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डॉ. संजीव अत्री - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
नैतिक शिक्षा के लिए विशेष रूप से प्रभावी 
डॉ. अत्री के अनुसार चयनित फिल्म दृश्यों का उपयोग विज्ञान (भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान), पर्यावरण शिक्षा, नशा मुक्ति और सामाजिक जागरूकता, नैतिक शिक्षा और जीवन मूल्य, भाषा शिक्षण (हिंदी और अंग्रेजी), सांस्कृतिक और विरासत शिक्षा सहित व्यावहारिक प्रयोगों में किया जा सकता है। भावनात्मक दृश्य नैतिक शिक्षा के लिए विशेष रूप से प्रभावी हो सकते हैं। डॉ. अत्री ने बताया कि इस अध्ययन के दौरान उन्होंने प्रतिदिन औसतन पांच घंटे फिल्में देखीं। कई बार रात में सात घंटे तक भी अध्ययन किया गया। यात्रा के दौरान भी फिल्मों के दृश्य देखकर उनके शैक्षिक उपयोग से जुड़े नोट्स तैयार किए गए। 
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