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Sirmour News: टपकती छत के नीचे इलाज, टब से संभाली रिसती व्यवस्था

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नाहन मेडिकल कॉलेज में बारिश में गायनी वार्ड की सीढ़ियों में बह रहा पानी, मरीज-तीमारदार परेशान
10 वर्ष बाद भी मेडिकल कॉलेज को नहीं मिला अपना भवन
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में बारिश होते ही व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी के ऊपरी मंजिल में छत से पानी टपकने के कारण मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, गायनी और मेडिसिन वार्ड की ओर जाने वाली सीढ़ियों में भी पानी रिस रहा है। वर्ष 2016 से मेडिकल कॉलेज क्रियाशील है। करीब दस वर्ष का समय बीतने के बाद भी मेडिकल कॉलेज को अपना भवन नसीब नहीं हो पाया है।
अस्पताल प्रबंधन ने पानी रिसने वाले स्थानों पर टब रखकर समस्या से निपटने का प्रयास किया। इससे अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं और मरीजों व स्टाफ की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उपचार के लिए आने वाले लोगों को पहले ही अस्पताल में भीड़ और अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ता है। अब बारिश के दौरान छत से पानी टपकने और फर्श पर पानी जमा होने से फिसलने का भी खतरा बना रहता है।
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सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस भवन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और तीमारदार पहुंचते हैं, वहां इस तरह पानी का रिसाव मरीजों की सुरक्षा के लिए कितना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी कक्ष की सिलिंग से भी पहले कई बार पानी रिस चुका है। बारिश के दौरान भवन के अलग-अलग हिस्सों में पानी का रिसाव होना कोई नई समस्या नहीं है। इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
अस्पताल प्रबंधन को कई बार भवन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि करीब एक दशक से मेडिकल कॉलेज पुराने भवन में संचालित होने के बावजूद नए भवन का निर्माण अभी तक क्यों पूरा नहीं हो पाया। वर्तमान में पुराने क्षेत्रीय अस्पताल के भवन में ही मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं। यहां प्रतिदिन करीब 1,000 से 1,200 मरीजों की ओपीडी रहती है।

मेडिकल कॉलेज के नए भवन का मुद्दा लंबे समय से सरकार और स्वास्थ्य विभाग के सामने उठता रहा है। अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में भवन निर्माण को लेकर घोषणाएं और प्रक्रियाएं आगे बढ़ीं, लेकिन जमीनी स्तर पर मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। एक ओर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 120 सीटों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था है, वहीं दूसरी ओर मूलभूत ढांचे के लिए पुराने भवन पर निर्भरता बनी हुई है।
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कोट...
भारी बारिश के चलते एक-दो स्थानों पर पानी रिसने की समस्या आई है। इसे ठीक करवाया जा रहा है। भवन पुराना होने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नए भवन का मामला सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। -डॉ. रेणु चौहान, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज नाहन
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