रासायनिक खाद के वितरण की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। भारतीय कृषि मंत्रालय की नई नीति खाद बिक्री व्यवस्था के तहत अब किसानों को रासायनिक खाद लेने के लिए किसान पहचान पत्र और आधार कार्ड अनिवार्य रूप से उपलब्ध करवाना होगा। नई व्यवस्था के तहत किसान की कृषि योग्य भूमि के रकबे के आधार पर ही डिजिटल माध्यम से खाद का कोटा तय किया जाएगा।
हिमफेड क्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी मदन सिंह ठाकुर ने सभी किसानों से आग्रह किया है कि खाद लेने से पहले वे अपना किसान पहचान पत्र और आधार संबंधी औपचारिकताएं पूरी कर लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान पहचान पत्र और आधार के बिना खाद की ऑनलाइन बुकिंग और आपूर्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकेगी। इससे किसानों को खाद लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
नई व्यवस्था के तहत किसान मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से अपनी आवश्यकता के अनुसार खाद की पहले से बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग पूरी होने के बाद किसान को एक क्यूआर संकेत कोड मिलेगा। अधिकृत खाद विक्रय केंद्र पर यह कोड दिखाने के बाद किसान को खाद उपलब्ध करवाई जाएगी। हालांकि, नई व्यवस्था के तहत खाद निर्धारित डिजिटल प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही प्राप्त की जा सकेगी।
नई व्यवस्था का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना और खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाना है। किसान पहचान पत्र के माध्यम से किसान और उसकी कृषि भूमि का विवरण डिजिटल रूप से जुड़ा रहेगा। इससे किसान की जमीन के रकबे के अनुसार ही खाद का आवंटन किया जा सकेगा। किसान पहचान पत्र भविष्य में विभिन्न सरकारी योजनाओं और अनुदान का लाभ लेने में भी उपयोगी होगा।
लोकमित्र केंद्र से बनवा सकेंगे किसान पहचान पत्र
जिन किसानों ने अभी तक किसान पहचान पत्र नहीं बनवाया है, वे अपने नजदीकी लोकमित्र केंद्र या साझा सेवा केंद्र में जाकर पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके लिए किसानों को आधार कार्ड, जमीन के दस्तावेज जैसे जमाबंदी या ताजा भू-अभिलेख और सक्रिय मोबाइल नंबर साथ ले जाना होगा। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे समय रहते सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर लें, ताकि फसल के मौसम में खाद की बुकिंग और उठान के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।