ददाहू (सिरमौर)। प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री रेणुका जी झील में पल रही मछलियों की अधिक संख्या उनके (मछलियों) अपने जीवन के लिए ही खतरा बन गई है। झील में अत्यधिक मछलियां होने से उनके मरने की आशंका पैदा हो गई है। चूंकि धार्मिक आस्था के चलते यहां पर मछलियों का शिकार नहीं लिया जा सकता लिहाजा, मत्स्य विभाग ने इसकी एक रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन और वन्य प्राणी विभाग को भेजकर मछलियां निकालने की सिफारिश की है। इस बारे में एक पत्र उपायुक्त सिरमौर और वन्य प्राणी विभाग के डीएफओ को भेजा गया है।
रेणुका झील में 19 प्रजाति की मछलियां पाई गई हैं। इनमें महाशीर की संख्या सबसे अधिक है। पिछले कुछ समय से कैटफिश (सिंगाडा) नामक प्रजाति की मछली ने जहां महाशीर की संख्या को कम कर दिया है। वहीं कैटफिश के बढ़ते प्रभाव से श्रद्धालु और पर्यटक झील में कदम रखने से घबरा रहे हैं।
वैज्ञानिकों की ओर से किए गए सर्वेक्षण के अनुसार रेणुका झील में 19 प्रजाति की मछलियां पाई गई हैं जिनमें से सर्वाधिक संख्या महाशीर और कैट फिश नामक मछली की है। शेष प्रजातियां काफी कम मात्रा में है। झील में मछलियां अधिक और रहने के लिए जगह कम होने से इनका जीवन संकट में पड़ सकता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार एक मछली के लिए पानी में एक क्यूविक मीटर जगह की जरूरत रहती है लेकिन संख्या अधिक होने के कारण यह जगह नहीं मिल रही। साथ ही झील का जल भी प्रदूषित हो गया है। लिहाजा, इनकी संख्या को कम करना जरूरी है।
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मछलियों की संख्या घटाना बेहद जरूरी: चौहान
मत्स्य पालन विभाग के सहायक निदेशक तपेश चौहान ने बताया कि रेणुका झील में पनपने वाली मछलियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करवाया जा चुका है। इस झील में 19 प्रजाति की मछलियां पाई गई हैं जिनकी संख्या हजारों में हैं। रेणुका झील में मछलियों के रखरखाव और जीवन से संबंधित एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके जिला प्रशासन को सौंप दी गई है। झील से मछलियों की संख्या को कम करना बेहद जरूरी है अन्यथा मछलियों का जीवन संकट में पड़ सकता है।