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Sirmour News: बागनाधार खदान हादसे में तीन मजदूरों की मौत पर माइन संचालक और मुंशी पर केस

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लापरवाही से जान जोखिम में डालने का आरोप, खदान की अनुमति और दस्तावेजों की भी होगी जांच
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संवाद न्यूज एजेंसी
कफोटा (सिरमौर)। कमरऊ के बागनाधार स्थित भीमगोडा चूना पत्थर खदान में हुए भीषण भूस्खलन में तीन मजदूरों की मौत के मामले में सिरमौर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए खदान संचालक और मुंशी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है। दोनों पर खदान का लापरवाहीपूर्ण संचालन कर मजदूरों की जान जोखिम में डालने का आरोप है। मामले में धारा 125 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है। अभी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
एसपी एनएस नेगी ने बताया कि यह मामला सतौन निवासी सतीश के बयान पर दर्ज किया गया है। 18 अगस्त को सतीश अपना टिपर लेकर बागनधार स्थित खदान में चूना पत्थर भरवाने गया था। मौके पर खदान का मुंशी बलबीर सिंह मौजूद था और पोकलेन मशीन से आगे खड़े टिपर में चूना पत्थर भरवाया जा रहा था।
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इसी दौरान पोकलेन चालक ने माइन से पत्थर गिरने की बात कही और मशीन छोड़कर मौके से बाहर निकल गया। खतरा भांपकर सतीश भी अपना टिपर छोड़कर बाहर निकल गया। इसी बीच अचानक भारी मलबा और पत्थर नीचे आ गिरे। इसकी चपेट में टिपर नंबर एचपी 17जे-4493 का चालक अनिल कुमार निवासी लगवास तथा नेपाली मूल के मजदूर धन सिंह और गजेंद्र बहादुर आ गए। तीनों पोकलेन मशीन और टिपर सहित मलबे में दब गए। हादसे के बाद बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे एनडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की टीमों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। लगातार स्लाइडिंग और ऊपर से गिरते मलबे के बीच खदान की तीन एलएनटी मशीनों की मदद से करीब 12 घंटे तक अभियान चलाया गया। दोपहर करीब एक बजे अनिल कुमार का शव बरामद हुआ। इसके बाद धन सिंह और शाम करीब पौने सात बजे गजेंद्र बहादुर का शव भी मलबे से बाहर निकाला गया। दोनों दबे ट्रकों को भी बरामद कर लिया गया, जबकि एक एलएनटी मशीन अभी मलबे में दबी है।

अब खदान की वैधता भी जांचेगी पुलिस
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि खदान संचालक के पास वैध अनुमति और सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद थे या नहीं। इसके लिए जिला खनन अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है। दस्तावेजों में किसी तरह की अनियमितता सामने आने पर मामले में अतिरिक्त धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।
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जिला खनन अधिकारी सरित चंद्र ने बताया कि मेजर चूना पत्थर खदानों में केंद्र सरकार के नियम लागू होते हैं। इनकी सर्टिफिकेशन केंद्र से होती है। ऐसे में इन खदानों पर दो माह तक खनन कार्य बंद होने के ऐसे कोई नियम नहीं हैं।
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