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Sirmour News: एफडीआर तकनीक से तैयार होगी रामपुरघाट नवादा से खोड़ोवाला तक सड़क

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एफडीआर तकनीक से बन रही रामपुरघाट नवादा से खोड़ोवाला सड़क कार्य निरीक्षण करते अधिशासी अभियंता
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एफडीआर तकनीक से तैयार होगी रामपुरघाट नवादा से खोड़ोवाला तक सड़क
पांच करोड़ रुपये बजट से तैयार की जा रही लगभग 5.5 किलोमीटर सड़क योजना
सिरमौर में इस नई तकनीक से तीन मार्ग बनेंगे, पांवटा में सोमवार को ट्रायल

सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। विश्व के कई देशों के बाद भारत के कुछ राज्यों में सड़क निर्माण में नई एफडीआर तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। प्रदेश के सिरमौर में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत पहली बार पूर्ण गहराई पुनर्ग्रहण तकनीक (एफडीआर) से तीन सड़कों का निर्माण होगा।
जिले के पांवटा में सबसे पहले इस तकनीक का सोमवार को ट्रायल हुआ। आईआईटी मंडी को सैंपल भेजें जाएंगे। सैंपल पास होने पर पांवटा के रामपुरघाट से नवादा खोड़ोवाला तक करीब पांच करोड़ लागत से 5.5 किलोमीटर मार्ग तैयार होगा।
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मिली जानकारी के अनुसार एफडीआर तकनीक के तहत सड़क पर तारकोल के साथ बिछाई कंकरीट को मशीनों की मदद से उखाड़ा जाता है। फिर उसी मेटेरियल को रिसाइकिल करके उसमें सीमेंट और केमिकल मिलाकर उसका फिर से इस्तेमाल किया जाता है। इसे ही एफडीआर तकनीक कहते हैं। यह तकनीक विदेशों के बाद देश के दूसरे राज्यों में तो इस्तेमाल हो रही है लेकिन हिमाचल प्रदेश में इसे प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है।
एफडीआर योजना में सिरमौर के तीन मार्ग पांवटा साहिब का खोड़ोवाला, शिलाई का कफोटा से कोटी व नाहन क्षेत्र का बिरला जमटा मार्ग शामिल हैं। इन्हें इस तकनीक से तैयार किया जाएगा। सोमवार को ट्रायल के तौर पर नई तकनीक से तैयार करीब 100 मीटर सड़क पैच का निर्माण किया गया।
इस दौरान अधिशासी अभियंता दलीप सिंह तोमर, सहायक अभियंता रामभज तोमर व कनिष्ठ अभियंता अजय कुमार मौजूद रहे।
बताया जा रहा है कि यह तकनीक काफी पर्यावरण प्रिय भी है क्योंकि इसमें पुराने मेटेरियल का अधिक से अधिक इस्तेमाल हो जाता है। सिरमौर में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत इसे पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है।

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता पांवटा साहिब दलीप सिंह तोमर व सहायक अभियंता रामभज तोमर ने पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि रामपुरघाट नवादा से खोड़ोवाला मार्ग पर इस तकनीक को अभी ट्रायल बेस पर कार्य शुरू किया गया है।
पूर्ण गहराई पुनर्ग्रहण (एफडीआर) तकनीक का परीक्षण हो रहा है। इस तकनीक में पुराने मेटेरियल का अधिक से अधिक इस्तेमाल हो जाता है। आईआईटी मंडी को सैंपल भेजा जाएगा जिसमें गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट आएगी। सैंपल पास होने पर योजना का आगामी कार्य पूरा किया जाएगा।
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समय के साथ पैसों की भी बचत
- प्रदेश में बजट को लेकर दिक्कतें आती रही है। एफडीआर पद्धति पर्यावरणीय प्रभाव को कम करती है। साथ ही निर्माण सामग्री लागत भी कम करती है। नई तकनीक से सिरमौर में ट्रायल कार्य हो रहा है। नई तकनीक से काम शीघ्र, विभाग व सरकार का खर्च भी कम होगा। भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम आने पर इनका और अधिक इस्तेमाल किया जा सकेगा।
संवाद
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