डा. कृष्णलाल सहगल।
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राजगढ़ (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध लोक गायक और संगीतज्ञ डॉ. कृष्णलाल सहगल को हिमाचल गौरव पुरस्कार से नवाजा गया है। अखिल भारतीय प्रवासी हिमाचली संयुक्त मोर्चा चंडीगढ़ ने उन्हें शास्त्रीय लोक संगीत में उन्हें सम्मान प्रदान किया।
बता दें कि डॉ. केएल सहगल के 1970 के दशक में आकाशवाणी से प्रसारित पारंपरिक लोक गीत ‘ऐसी मुजरे जोगी जवाना बे’ को आज भी लोग सुनते और गाते हैं। हिमाचल के पहाड़ी गीत, लोक संस्कृति एवं सुगम संगीत को बढ़ावा देने में उनका विशेष योगदान रहा है। शास्त्रीय संगीत और गजल गायन में हिमाचल में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है। डॉ. सहगल हिमाचल शिक्षा विभाग के कॉलेज कैडर से एसोसिएट प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।
विकास खंड राजगढ़ की भुईरा पंचायत के रहने वाले डॉ. सहगल ने विकट परिस्थितियों का सामना करते हुए न केवल उच्च शिक्षा प्राप्त की बल्कि संगीत में भी पीएचडी की उपाधि भी हासिल की। संगीत की शिक्षा उन्हें विरासत में मिली है। उनके पिता बेहतरीन ढोलक और अन्य वाद्य यंत्रों के अपने जमाने के वादक रहे। उनकी माता ने आजादी से पूर्व फिल्मों की नगरी रहे लाहौर में फिल्मों में भी काम किया था।
प्रदेश में उनकी मधुर आवाज का कोई सानी नहीं है। उन्होंने लोक संगीत की मौलिकता को रखते हुए सैकड़ों नाटियां, भजन और देव स्तुतियां बनाकर अमिट छाप छोड़ी है। उन्हें देश और प्रदेश में अनेकों पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। हिमाचल गौरव पुरस्कार जोगिंद्रा केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष योगेश भारतीय और राजकीय मेडिकल कॉलेज चंडीगढ़ के वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डॉ. अशोक अत्री ने प्रदान किया।
प्रसिद्ध लोक गायक डा. कृष्णलाल सहगल को चंडीगढ़ में सम्मानित करते मोर्चा के पदाधिकारी। संवाद- फोटो : NAHAN