बिजली बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त और एसपी को सौंपा ज्ञापन
आपदा के दौर में बोर्ड के बद्रीपुर कार्यालय पहुंच कर धमकाने से उखड़े
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन/पांवटा साहिब(सिरमौर)। बिजली बोर्ड के कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल नाहन में उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक सिरमौर से मिला। इस दौरान पांवटा साहिब में तथाकथित किसानों की ओर से पांवटा साहिब विद्युत बोर्ड कार्यालय में घुसपैठ, कर्मचारियों को धमकाने और भ्रामक प्रचार करने की शिकायत की है। शिकायत में आरोप लगाया है कि विद्युत बोर्ड की गरिमा को धूमिल करने, कर्मचारियों का मनोबल तोड़ना और आम जनता को भड़काने के प्रयास हो रहे हैं। ऐसी प्रवृत्ति किसी भी सभ्य समाज और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घोर चिंताजनक है।
बुधवार को बिजली बोर्ड के अधीक्षण अभियंता विरेंद्र शर्मा, वरिष्ठ अधिशासी अभियंता पांवटा साहिब अंशुल ठाकुर, सहायक अभियंता धौलाकुआं सुमित चौधरी, सहायक अभियंता पांवटा साहिब अंकुर शर्मा, मुकेश चौधरी, रविशंकर, अरुण दीप सिंह, सुमित चौधरी व गुरदत सिंह चौहान समेत अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त तथा एसपी सिरमौर को ज्ञापन सौंपा है इसमें कहा कि मंगलवार को तथाकथित किसानों के एक समूह ने हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड, वरिष्ठ अधिशासी अभियंता कार्यालय बद्रीपुर में जबरन प्रवेश किया। बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को डराया-धमकाया है। इस तरह की दबंगई की घटना से साफ है कि इनका उद्देश्य केवल विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों का मनोबल तोड़ना और आम जनता को भड़काना है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल बिजली बोर्ड के अधिकारियों व कर्मचारियोंं ने कहा कि भारी बरसात के चलते आपदा की स्थिति बनी हुई है। बिजली बोर्ड का कार्य आसान नहीं है। हर विकट हालत के बावजूद कर्मचारी कठिन पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों में, तेज वर्षा, बर्फबारी, भूस्खलन, गिरते हुए पेड़-पौधों और टूटते हुए खंभों के बीच अपनी जान की बाजी लगाकर बिजली आपूर्ति को बनाए रखते हैं। भयंकर वर्षा एवं आपदा के समय भी जब सड़कें टूटीं, गांव कट गए, पुल बह गए तब सबसे पहले बिजली बोर्ड के कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर रोशनी बहाल की है। बिजली पहुंचाने के लिए कर्मचारियों ने अपनी नींद, भोजन और परिवार की परवाह किए बिना कार्य किया।
बिजली बोर्ड के अधिकारियों ने कहा कि सरकारी कार्यालय में दबंगई करना और कानून को अपने हाथ में लेना, लोकतांत्रिक समाज में इस तरह की गतिविधियों के लिए ठीक नहीं है।
इसके लिए तथाकथित किसान मोर्चा के लोग सार्वजनिक रूप से अपनी भूल स्वीकार कर क्षमा मांगे। ऐसा नहीं करने पर भविष्य में विद्युत आपूर्ति में आई बाधा को बहाल करना संभव नहीं है। यह निर्णय बिजली बोर्ड कर्मचारियों की गरिमा, सुरक्षा और मनोबल की रक्षा को लिया गया है।
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