युवा पीढ़ी में बढ़ती नशावृत्ति पर चिंतन, मंथन और कार्रवाई जरूरी : कुंदन शास्त्री
कहा, खतरनाक रूप ले चुका स्मैक, चिट्टा, चरस और शराब समेत नशा कारोबार
जिले का बुद्विजीवी वर्ग लगातार फैलते नशे के इस मकड़जाल से बेहद चिंतित
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब(सिरमौर)। शांत हिमाचल की युवा पीढ़ी का नशे की गिरफ्त में आना चिंताजनक है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल से नशे की आपूर्ति करने वाले काफी संख्या में पकड़े गए हैं। उससे कहीं अधिक ऐसे लोगों की संख्या हो सकती है जो अब तक भी पकड़ से बाहर हैं। जनपद का बुद्विजीवी वर्ग इस विकराल होती समस्या को लेकर चिंतित नजर आ रहा है।
समाजसेवक कुंदन सिंह शास्त्री, रामेश्वर शर्मा, रामभज चौहान, बलबीर पुंडीर, सीआर शर्मा, अतर सिंह, जीएस नेगी व जय सिंह चौहान का कहना है कि चिट्टा, हेरोइन, चरस व शराब आदि नशे का कारोबार खतरनाक रूप ले चुका है। नशे की सप्लाई चेन इतनी चतुराई, ईमानदारी, प्रामाणिकता और गोपनीयता के साथ मजबूती से काम करती है कि उसे पकड़ना कतई आसान नहीं है। तब तो और भी कठिन हो जाता है जब अवैध कमाई के इस नशा कारोबार में पुलिस अधिकारी, डाॅक्टर, इंजीनियर और राजनेताओं तक की संलिप्तता उजागर होती जा रही है।
समाजसेवी कुंदन सिंह शास्त्री का कहना है कि पुलिस प्रशासन, सामाजिक संगठनों और शिक्षण संस्थानों को मिलकर तीन स्तर पर काम करना होगा। इसमें पहला स्कूलों व काॅलेज में सभी विद्यार्थियों के साथ प्रार्थना सभा में रोचक तरीके से संवाद किया जाए। जिन विद्यार्थियों को नशे की आदत लग चुकी है उनकी सूची बनाकर प्यार और विश्वास के साथ नशा छोड़ने के लिए उनको प्रेरित किया जाना चाहिए।
दूसरा पुलिस प्रशासन को चाहिए कि ग्राम स्तर पर महिलाओं और युवाओं के साथ तालमेल बनाकर नशे का कारोबार करने वाले लोगों को चिह्नित करके एक बार प्यार से समझाया जाए, जो नहीं मानते उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करवाने में भी संकोच नहीं करना चाहिए। यदि कुछ महिला समूह साहसिक कदम उठाते हुए जिस विवाह समारोह में शराब परोसी जाएगी उसका बहिष्कार करने का निर्णय ले सकें तो देखा देखी में नशे के खिलाफ क्रांंतिकारी माहौल बन सकता है।
तीसरा, पुलिस प्रशासन को नशा कारोबारियों की धड़पकड़ करते हुए सप्लाई चेन को ध्वस्त किया जाना बहुत आवश्यक है। इसके लिए जनता को भी गोपनीयता के साथ नशा कारोबारियों के बारे में सही सूचना देने में पुलिस प्रशासन की मदद करनी पड़ेगी। यदि तीनों स्तरों पर तालमेल बनाकर प्रयास किए जाएंगे तो बहुत बेहतर परिणाम मिलेंगे।
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