राजगढ़ (सिरमौर)। इस बार कम बर्फबारी और बारिश से बागवानों के चेहरे लटके हैं। बागवानों को अच्छी फसल न होने की आशंका पैदा हो गई है। बता दें कि फलदार पौधों के लिए चिलिंग ऑवर्स बहुत अहम हैं। यह जरूरत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने से ही पूरी होती है।
इस साल सर्दियों में कम बारिश और बर्फबारी से चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं हुए हैं। इससे फसल का प्रभावित होना निश्चित है। बता दें कि पीच वैली के नाम से प्रसिद्ध राजगढ़ क्षेत्र में आड़ू प्रमुख फसल है। यहां कुछ वर्षों से लोगों ने सेब के बागीचे बड़े पैमाने पर लगाए हैं।
बागवान सुरेंद्र तोमर, रविदत्त भारद्वाज, अनिल शर्मा और विक्रम ने बताया कि इस वर्ष कम बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में मात्र एक बार हल्की बर्फबारी से फलदार पौधों के लिए जहां आवश्यक चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं होंगे। वहीं दिन के समय में तापमान में वृद्धि लाभकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि जमीन में नमी कम होने से पौधों की बढ़ोतरी पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि फरवरी में यदि बर्फबारी और बारिश होगी तो फलदार पौधों में तापमान के घटने-बढ़ने से फसल की कम सेटिंग होगी। यही नहीं पत्ते आने के बाद टफरीना रोग की आशंका भी हो जाती है।
इस बारे में विषय विशेषज्ञ उद्यान उजागर सिंह तोमर ने कहा कि आड़ू के लिए तो पांच सौ घंटे चिलिंग ऑवर्स शायद पूरे हों लेकिन सेब के लिए आवश्यक 1600 घंटे पूरे न होने से फसलें प्रभावित होंगी। उन्होंने कहा कि सर्दियों में अच्छी बर्फबारी और बारिश फलदार पौधों के लिए जरूरी है, जो इस बार पूरी नहीं हो रही है।