संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। पांवटा साहिब उपमंडल की राजकीय प्राथमिक पाठशाला दिघाली में मिड-डे मील (एमडीएम) कर्मी की भर्ती को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। भर्ती प्रक्रिया में पात्र महिला उम्मीदवार की अनदेखी किए जाने के आरोप लगने के बाद सोमवार को दूसरे पक्ष ने नाहन आकर उपायुक्त से भेंट की और अपनी बात रखी।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल राखी ने बताया कि उसने मिड-डे मील कर्मी की भर्ती के लिए दिघाली स्कूल में वो सभी दस्तावेज दिए थे जो मांगे गए थे। मेरी शैक्षणिक योग्यता और दूसरी उपलब्धियों को देखते हुए ही स्कूल प्रबंधन ने मेरा चयन इस पद के लिए किया है।
वहीं, प्रतिनिधिमंडल में शामिल अन्य महिला ने बताया कि इससे पूर्व वह दिघाली स्कूल में मिड-डे मील कर्मी के रूप में सेवाएं दे रही थीं। 20 साल के बाद जब वह रिटायर्ड हुई तब नई भर्ती की गई। इस दौरान किसी के साथ भी जातिगत भेदभाव स्कूल में नहीं हुआ। पूरा स्कूल प्यार के साथ चलता रहा। महिला ने बताया कि आपसी रंजिश के चलते झूठे जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए जा रहे हैं। स्कूल में अन्य कर्मी भी एससी वर्ग से आते हैं।
बता दें कि इससे पूर्व स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रोशन लाल के नेतृत्व में ग्रामीण शनिवार को उपायुक्त कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और पात्रता मानदंडों की अनदेखी करते हुए एक अन्य महिला को मिड-डे मील कर्मी के रूप में नियुक्ति दे दी गई, जबकि वास्तविक पात्र उम्मीदवार को नजरअंदाज कर दिया गया।
एसएमसी अध्यक्ष रोशन लाल का यह भी आरोप था कि इस संबंध में पहले भी संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई न होने के कारण अब उपायुक्त के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की गई है, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
अब इस मामले में दूसरे पक्ष की महिलाओं ने उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा से मुलाकात की और उनके सामने अपना पक्ष रखकर आरोपों को बेबुनियाद बताया।