प्रबोधिनी एकादशी पर रेणुका झील में पवित्र स्नान करते श्रद्धालु।
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ददाहू (सिरमौर)। अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेले के मद्देनजर कोरोना का कहर आस्था पर भारी दिखाई दे रहा है। हरिप्रबोधनी एकादशी पर हजारों की संख्या में जुटने वाली भीड़ नाममात्र के श्रद्धालुओं में ही सिमट कर रह गई। यहां तक की स्नानघाट पर श्रद्धालु कम और पुलिस कर्मी अधिक दिखाई दिए।
कार्तिक मास में पड़ने वाली हरिप्रबोधनी एकादशी पर ऐतिहासिक रेणुका झील में स्नान करने की सदियों पुरानी परंपरा है। इस दिन पूरे उत्तर भारत से आकर हजारों लोग रेणुका झील में आस्था की डुबकी लगाकर स्नान करते हैं लेकिन इस वर्ष कोरोना काल के चलते एकादशी स्नान को लेकर श्रद्धालुओं में कोई उत्साह नहीं दिखाई दिया।
करीब कुछेक सौ लोगों के बीच ही स्थानीय लोगों ने झील में स्नान करके इस परंपरा को कायम रखा। जबकि जिला प्रशासन की ओर से शाही स्नान को लेकर पुख्ता प्रबंधन किए जाने के साथ ही विशेष एसओपी भी जारी की गई थी जहां महिला और पुरुष स्नानघाट पर एक समय में केवल 26 लोगों को ही स्नान करने की इजाजत थी लेकिन श्रद्धालुओं के न आने से जिला प्रशासन के सभी प्रबंधन भी धरे रह गए।
हालांकि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में तीर्थ में रह रहे संत महात्माओं ने भी झील में स्नान करके स्नान महात्मय का शुभारंभ किया। स्नान महात्मय को लेकर मौसम का प्रभाव भी लोगों की आस्था पर भारी पड़ा। बुधवार सुबह से ही बारिश के आसार बने रहे। दिनभर धूप का नामोनिशान नहीं दिखाई दिया। अब, कार्तिक पूर्णिमा के दिन भीड़ उमड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।