नाहन (सिरमौर)।
न कोई मोबाइल लोकेशन और न ही कोई बड़ा सुराग पुलिस के पास था। सजायाफ्ता हत्यारे लक्ष्मण को दबोचना सिरमौर पुलिस के लिए आसान नहीं था लेकिन एसपी रोहित सिरमौर मालपानी की निगरानी में चला सर्च ऑपरेशन आखिर कामयाब हो गया। फरार कैदी को पकड़ने में पुलिस के बड़े अधिकारियों के साथ छोटे पद के कर्मचारियों ने भी खूब पसीना बहाया। फरार होने के बाद उसके घर पहुंचने की संभावना सबसे प्रबल थी। ताजा ऑपरेशन होने के कारण वह न तो ज्यादा भाग सकता था और न ही सफर कर सकता था। ऐसे में आशंका थी कि परिजनों के साथ वह जरूर संपर्क में रहा होगा। बस, पुलिस ने इसी पर योजना बनाकर अपना जाल बिछाया और कामयाब हो गई।
पुलिस के मुताबिक हत्या के जुर्म की सजा भुगत रहे लक्ष्मण पटेल के पास मोबाइल भी नहीं था। मोबाइल होता तो लोकेशन से उसका पता लगाया जा सकता था। ऐसे में फरार कैदी को पकड़ना अंधेरे में तीर मारने सरीका था। खैर, पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया। वाराणसी में जाकर उसके भाई से भी पूछताछ की गई। इसके बाद उसे दबोचा जा सकता।
बताया जा रहा है कि वाराणसी में वह घर भी नहीं गया था। उसे दबोचने में पुलिस के लिए क्या तकनीक मददगार साबित हुई। इसका खुलासा टीम के नाहन पहुंचने पर ही चल सकेगा लेकिन वह अपने घरवालों से संपर्क में था। पुलिस ने उसके परिजनों को सर्विलांस में रखा होगा। इसकी संभावना प्रबल है लेकिन अधिकारिक तौर पर अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस अधीक्षक रोहित मालपानी का कहना है कि कैदी को पकड़ने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया गया। इसके लिए कई टीमें बनाई गई थीं। वह स्वयं, एएसपी, डीएसपी इसकी निगरानी कर रहे थे। कैदी को पकड़ने के लिए वाराणसी की नहीं बल्कि पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड दिल्ली आदि को भी टीमें भेजी गई थी। जबकि सिरमौर के जंगलों में भी सर्च ऑपरेशन छेड़ा गया था। उन्होंने बताया कि कैदी के पास कोई मोबाइल भी नहीं था। उसे कैसे दबोचा गया इसका पुरा खुलासा टीम के यहां पहुंचने पर ही किया जाएगा।