फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चंद पैसों के लिए जिंदगी खतरे में डाल रहे लोग

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन


सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। उत्तराखंड व हिमाचल प्रशासन की हिदायतों के बावजूद लोग अपनी जिंदगी खतरे में डाल रहे हैं। रेत-बजरी निकालने या लकड़ी निकालकर चंद पैसों के लालच में लोग अपनी जिंदगी की भी परवाह नहीं कर रहे। जरा से पानी कम हुआ नहीं कि गुज्जर समुदाय के लोग नदी के बीच में बने टापूओं में पशुओं को चराने के लिए पहुंच जाते हैं।
पिछले महीने रामपुरघाट में आधा दर्जन लोग नदी की लहरों के बीच फंसे थे जिनको डीएसपी प्रमोद चौहान व तहसीलदार पांवटा विमला पोखरियाल वर्मा ने मौके पर पहुंच कर स्थानीय गोताखोर व स्वयंसेवी संगठनों की मदद से बचाया था।
विज्ञापन

अब शुक्रवार रात फिर 21 लोग फंस गए। गनीमत रही कि उत्तराखंड व हिमाचल प्रशासन को समय रहते सूचना मिल गई, अन्यथा गुज्जर समुदाय से जुड़े दोनों परिवारों का जीवन संकट में था। चंद सिक्कों के लिए उफनती नदी के बीच पहुंच कर लोग रेत बजरी उठाने व नदी में जल स्तर बढ़ने से बहकर आने वाली लकड़ी पकड़ने के लिए जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। दोनों राज्यों के विकासनगर व पांवटा प्रशासन की पूर्व चेतावनी व निर्देशों की कोई परवाह नहीं की जाती है।
बॉक्स के लिए---
1. सख्त कार्रवाई की जाएगी : डीएसपी
-डीएसपी पांवटा प्रमोद चौहान ने कहा कि जान जोखिम में डालने वाले ऐसे लापरवाह लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी जो बरसात के मौसम में नदियों में उतर कर अवैध रुप से रेत बजरी उठान, मवेशियों को चराने व लकड़ी पकड़ने पहुंचते हैं।
विज्ञापन


2. दो दिन पहले सिंघपुरा में थे गुज्जर
यमुना नदी में फंसने वाले दो परिवार दो दिन पहले सिंगपुरा में थे। पानी कम होने पर नदी के बीच टापू पर भैंसों व घोड़े खच्चरों को चराने पहुंच गए। भंगानी के सिंगपुरा पुलिस चौकी प्रभारी चेतन चौहान ने उन्हें सुरक्षित स्थल पर जाने को कहा था जिसके बाद इन गुज्जर परिवारों ने हिमाचल की तरफ से तंबू उखाड़ लिए लेकिन उत्तराखंड की तरफ टापू पर बीच में जाकर तंबू गाड़ दिया और वहां रहने लगे।
----चंद पैसों के लिए जिंदगी खतरे में डाल रहे लोग
प्रशासन की चेतावनी के बावजूद बरती जा रही लापरवाही
हर साल यमुना नदी के तेज प्रवाह में फंस जाते हैं लोग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें