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Sirmour News: अदालत 2

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33 बीघा जमीन पर मालिकाना हक बरकरार
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अदालत ने बिक्री और राजस्व प्रविष्टियां की रद्द
- ददाहू तहसील के चोर्टिया बनोगटा क्षेत्र की 33 बीघा भूमि से जुड़ा विवाद, कोर्ट ने 2007-08 में की गई बिक्री विलेख को माना अवैध
- प्रतिवादियों को जमीन में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करने का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश की अदालत ने ददाहू तहसील के चोर्टिया बनोगटा क्षेत्र की लगभग 33 बीघा भूमि से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कुछ बिक्री विलेखों (सेल डीड) को अवैध ठहराते हुए उन्हें रद्द कर दिया और भूमि पर वादियों का मालिकाना हक बरकरार रखा।
अदालत में दायर वाद के अनुसार वादी पक्ष ने बताया कि उनके पूर्वजों ने करीब 44 बीघा भूमि में से तीन-चौथाई हिस्सा खरीदा था। इसमें से विवादित भूमि 33 बीघा बताई गई। आरोप था कि भूमि के पूर्व मालिक ने न्यायालय में लंबित मामले के दौरान ही अपनी हिस्सेदारी से अधिक जमीन अन्य लोगों को बेच दी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वर्ष 2007 और 2008 में की गई बिक्री रजिस्ट्री उस समय की गई थीं जब जमीन से संबंधित मुकदमा उच्च न्यायालय में लंबित था। इसलिए यह लेन-देन ‘लिस पेंडेंस’ सिद्धांत के अंतर्गत अवैध माना गया।
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अदालत ने फैसले में कहा कि संबंधित बिक्री विलेख वैध नहीं हैं और इनके आधार पर की गई राजस्व रिकॉर्ड की प्रविष्टियां भी अमान्य मानी जाएंगी। साथ ही अदालत ने प्रतिवादियों को आदेश दिया कि वे भविष्य में इस जमीन में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करें। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश उपासना शर्मा की अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए वादी संजय सिंह, बृजेश्वर सिंह, विद्या और यशपाल को विवादित भूमि का वैध मालिक माना और स्थायी निषेधाज्ञा जारी कर दी।
संवाद
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