हत्याकांड : न्यायिक हिरासत प्रक्रिया में
चूक, हत्या मामले में कमिटल आदेश रद्द
- सेशन कोर्ट ने केस दोबारा सुनवाई के लिए ट्रायल कोर्ट भेजा, आरोपी की हिरासत का स्पष्ट उल्लेख नहीं
- साल 2025 में पांवटा साहिब में मजदूर की हत्या का मामला, अब 6 अप्रैल को फिर होगी पेशी
- कानूनी प्रावधानों के तहत कमिटल आदेश नए सिरे से जारी करने के निर्देश
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। पांवटा साहिब के चर्चित मजदूर हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया में हुई चूक के चलते मामला एक बार फिर शुरुआती स्तर पर पहुंच गया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कपिल शर्मा ने निचली अदालत (एसीजेएम कोर्ट) के पारित कमिटल आदेश में कानूनी खामियां पाते हुए उसे रद्द कर दिया है। साथ ही केस को दोबारा सुनवाई के लिए एसीजेएम कोर्ट को भेज दिया है। अब आरोपी रघुबीर को 6 अप्रैल को फिर अदालत में पेश किया जाएगा। अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि 29 जनवरी 2026 को दिए गए कमिटल आदेश में बीएनएसएस की धारा 232 का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया।
यह घटना 10 अक्टूबर 2025 को हिमुडा कॉलोनी क्षेत्र में हुई थी। एक निर्माणाधीन मकान की छत पर काम कर रहे मजदूरों के बीच विवाद अचानक हिंसक झगड़े में बदल गया। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने राम रच्छा का शव खून से लथपथ हालत में बरामद किया था। पास ही खून से सनी लोहे की रॉड भी मिली। मृतक मकान में टाइल्स लगाने का काम करता था। जांच में सामने आया कि ठेकेदार के जाने के बाद शाम 7:15 बजे मजदूरों के बीच कहासुनी हुई, जो देखते की देखते मारपीट में बदल गई। आरोप है कि रघुवीर ने गुस्से में आकर लोहे की रॉड से कई वार किए। इससे राम रच्छा की मौके पर ही मौत हो गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक की मौत सिर में गंभीर चोट, अत्यधिक खून बहने और शॉक के कारण हुई। सुनवाई के दौरान मंगलवार को अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने पाया कि निचली अदालत के कमिटल फैसले में प्रक्रिया संबंधी खामियां थीं। खासतौर पर आरोपी को ट्रायल के दौरान न्यायिक हिरासत में रखने से जुड़े जरूरी प्रावधानों का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। इसे अदालत ने गंभीर प्रक्रियात्मक चूक माना। न्यायालय के आदेश के बाद अब निचली अदालत को सभी आवश्यकताओं और कानूनी मापदंडों का पालन करते हुए नए सिरे से कमिटल आदेश जारी करना होगा। इसके बाद की मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।
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