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Sirmour News: अदालत 4

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साक्ष्य के अभाव में कूहल-टंकी विवाद की अपील खारिज
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अतिरिक्त जिला न्यायाधीश नाहन ने निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा,
कहा- हस्तक्षेप और नुकसान के आरोप साबित नहीं हुए


संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन। तहसील नाहन के सिम्बलवाला क्षेत्र में पानी की कूहल और सिंचाई टंकी को लेकर वर्षों से चल रहे पारिवारिक भूमि विवाद में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने चमन लाल और पवन कुमार की ओर से दायर सिविल अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा है।
वादियों का आरोप था कि प्रतिवादियों ने उनकी मालिकाना भूमि में घुसकर सिंचाई के लिए बनी कूहल और पानी की टंकी को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास किया। इस आधार पर उन्होंने स्थायी एवं अनिवार्य निषेधाज्ञा की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि विवादित जलस्रोत का उपयोग लंबे समय से दोनों पक्ष करते रहे हैं। उनका कहना था कि वादी उन्हें सिंचाई के पानी के उपयोग से रोकना चाहते हैं और इसी विवाद को लेकर पहले भी मुकदमेबाजी हो चुकी है।
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अदालत ने पाया कि वादी यह साबित नहीं कर सके कि प्रतिवादियों ने वास्तव में कूहल या पानी की टंकी को नुकसान पहुंचाया। अदालत ने यह भी कहा कि कथित नुकसान के समर्थन में कोई फोटोग्राफ, सीमांकन नक्शा, स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी गवाह या अन्य ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। अदालत ने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल भूमि का स्वामित्व सिद्ध होना पर्याप्त नहीं है। राहत प्राप्त करने के लिए यह साबित करना भी आवश्यक है कि प्रतिवादी ने वास्तव में अवैध हस्तक्षेप या नुकसान पहुंचाया हो। अदालत ने अपील को लागत सहित खारिज करते हुए 6 नवंबर 2015 के निचली अदालत के निर्णय और डिक्री को यथावत रखने के आदेश दिए।
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