पति, पत्नी और बच्चे को अपने
स्तर की जीवन शैली करे प्रदान
घरेलू हिंसा मामले में अदालत की टिप्पणी, भरण-पोषण राशि 12 से बढ़ाकर की 15 हजार रुपये प्रतिमाह
न्यायाधीश कपिल शर्मा ने ट्रायल कोर्ट का फैसला संशोधित, पत्नी की अर्जी मंजूर
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)।
घरेलू हिंसा मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पत्नी और बच्चे को वही स्तर का जीवन मिलना चाहिए, जैसा पति स्वयं जी रहा है। न्यायाधीश कपिल शर्मा ने ट्रायल कोर्ट के आदेश में संशोधन करते हुए भरण-पोषण राशि को बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पत्नी और बच्चे की आर्थिक सुरक्षा पति की जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा कि जीवन की आवश्यकताओं और बच्चे की परवरिश के लिए पर्याप्त राशि मिलना जरूरी है।
यह फैसला गीता बनाम आशुतोष और अन्य मामले में सुनाया गया। पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत 13 दिसंबर 2024 को न्यायिक दंडाधिकारी (ट्रायल कोर्ट) के आदेश को चुनौती देते हुए भरण-पोषण राशि बढ़ाने की मांग की थी। अपील में कहा गया कि पति की मासिक आय 40 से 50 हजार रुपये से अधिक है। इसके बावजूद तय की गई राशि वर्तमान परिस्थितियों में पर्याप्त नहीं है। पत्नी ने अदालत को बताया कि उसका नाबालिग बेटा भी उसके साथ रह रहा है और उसकी पढ़ाई समेत सभी आवश्यक खर्चों का भार स्वयं उठा रही है। वहीं पति की ओर से दलील दी गई कि ट्रायल कोर्ट ने सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ही भरण-पोषण राशि तय की थी। इसलिए उसमें बढ़ोतरी की कोई आवश्यकता नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि पति की आय और वर्तमान महंगाई को देखते हुए 12 हजार रुपये प्रतिमाह की राशि अपर्याप्त है। अदालत ने महिला की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए भरण-पोषण राशि को 12 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह करने का आदेश दिया। साथ ही निर्देश दिया कि संशोधित भरण-पोषण राशि ट्रायल कोर्ट के आदेश की तिथि से लागू होगी। हालांकि, महिला की ओर से 25 हजार रुपये प्रतिमाह की मांग को अदालत ने स्वीकार नहीं किया।