जिला न्यायाधीश ने बरकरार रखा ट्रायल कोर्ट का फैसला, साल 2021 का तहसील नाहन का मामला
कोर्ट ने कहा, संयुक्त भूमि पर निर्माण मात्र से सह-हिस्सेदार को नहीं किया जा सकता बेदखल
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त जिला न्यायालय ने संयुक्त भूमि पर निर्माण कार्य रोकने की मांग से जुड़ी एक सिविल अपील खारिज कर दी। अदालत ने अगस्त 2025 को ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि केवल इस आधार पर किसी सह-हिस्सेदार को संयुक्त भूमि पर निर्माण करने से नहीं रोका जा सकता कि भूमि का बंटवारा अभी तक नहीं हुआ है।
यह मामला साल 2021 को तहसील नाहन का है। अपीलकर्ता जगदीश सिंह ने अश्वनी कुमार व अन्य के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा की मांग करते हुए सिविल कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि प्रतिवादी संयुक्त भूमि के बेहतर हिस्से पर अवैध रूप से निर्माण कर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। ट्रायल कोर्ट ने अगस्त 2025 में याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ अपील दायर की गई। अपील में कहा गया कि संयुक्त भूमि का विधिवत बंटवारा नहीं हुआ है और सभी सह-हिस्सेदारों का हर हिस्से पर समान अधिकार है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वादी स्वयं भी संबंधित खसरा नंबर पर मकान बना चुका है और अन्य सह-हिस्सेदारों ने भी वहां निर्माण कर रखा है। अदालत ने यह भी माना कि वादी यह साबित नहीं कर सका कि प्रतिवादियों के निर्माण से भूमि की उपयोगिता या मूल्य में कोई कमी आएगी। अदालत ने हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि संयुक्त भूमि पर निर्माण मात्र से किसी सह-हिस्सेदार को बेदखल नहीं माना जा सकता। जब तक यह साबित न हो कि निर्माण से दूसरे हिस्सेदार के अधिकारों को वास्तविक नुकसान पहुंच रहा है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।