फैमिली कोर्ट ने सुनाया फैसला, पीड़िता ने पति पर दहेज प्रताड़ना, मारपीट के लगाए थे आरोप
साल 2024 को पांवटा साहिब का मामला, कोर्ट ने कहा-महिला के साथ क्रूरता, प्रताड़ना और परित्याग के आरोप साबित
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। शादी के कुछ ही महीनों बाद दहेज प्रताड़ना, मारपीट और परित्याग का शिकार हुई महिला को आखिरकार अदालत से राहत मिल गई। फैमिली कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच लंबे समय से खत्म हो चुके रिश्ते को देखते हुए तलाक की डिक्री जारी कर दी।
यह मामला सिरमौर जिले के उपमंडल पांवटा साहिब का है। पीड़िता जाहिरा की शादी 7 मई 2024 को नाजिम के साथ मुस्लिम रीति-रिवाजों से हुई थी। शादी के शुरुआती दिनों के बाद पति का व्यवहार बदल गया। महिला ने अदालत में आरोप लगाया कि उसे छोटी-छोटी बातों पर प्रताड़ित किया जाता था। रिश्तेदारों के सामने अपमानित किया जाता और कई बार मारपीट भी की गई। पीड़िता ने बताया कि हालात इतने बिगड़ गए कि अगस्त 2024 में उसे ससुराल छोड़कर अलग रहना पड़ा। याचिका में कहा गया कि दोनों परिवारों ने कई बार समझौते के प्रयास किए, लेकिन संबंध सामान्य नहीं हो सके। बाद में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हुआ। घरेलू सामान लौटाया गया और मेहर (मुस्लिम विवाह में वधू को देय राशि) की राशि का भुगतान भी किया गया।
अदालत में यह भी बताया गया कि पति ने मुस्लिम कानून के तहत तीन बार तलाक बोलकर विवाह समाप्त करने की घोषणा कर दी थी। सुनवाई के दौरान पति अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके चलते कोर्ट ने उसे एकपक्षीय घोषित कर दिया। महिला और उसके पिता के बयानों को अदालत ने विश्वसनीय माना। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश कपिल शर्मा की अदालत ने फैसले में कहा कि महिला के साथ क्रूरता, प्रताड़ना और परित्याग के आरोप साक्ष्यों से साबित होते हैं। इस स्थिति में अदालत ने दोनों के विवाह को आधिकारिक रूप से समाप्त घोषित कर दिया। संवाद