नाहन (सिरमौर)। जनपद सिरमौर के कई क्षेत्रों में अमेरिकन कीट ने मक्की को चट करना शुरू कर दिया है। फाल आर्मी वर्म नाम के इस कीट के लक्षण मक्की में दिखने शुरू हो गए हैं। लिहाजा, विभिन्न इलाकों के किसानों की चिंता बढ़ गई है।
अधिकतर किसानों ने कृषि विभाग के विभिन्न केंद्रों से मक्की का बीज खरीदा है। कई किसानों ने घरेलू बीज भी खेतों में बीजा है। दोनों तरह के बीजों से तैयार अगेती और पछेती मक्की को फॉल आर्मी वर्म नुकसान पहुंचा रहा है।
बता दें कि जिला सिरमौर में 24,000 हेक्टेयर भूमि पर मक्की का उत्पादन किया गया है। अभी मक्की की बिजाई के किए एक से डेढ़ माह का समय हुआ है। इस बीच नाहन, पांवटा साहिब समेत कई इलाकों में मक्की की फसल कीट से प्रभावित होने लगी है। शिलाई और पच्छाद के कुछेक क्षेत्रों में भी फसल में कीट के लक्षण दिखने शुरू हो गए हैं। ये एक तरह का कीड़ा है जो पत्तों का रस चूसकर छलनी कर रहा है। जिन क्षेत्रों में गर्मी का प्रकोप ज्यादा है, वहां ये कीट ज्यादा सक्रिय है।
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अमेरिका से दक्षिण भारत में पहुंचा था फाल आर्मी वर्म
वैज्ञानिकों के अनुसार फाल आर्मी वर्म को अमेरिकन कीट के नाम से जाना जाता है। बीजों के आयात के साथ अमेरिका से ये कीट भारत के कर्नाटका में पहुंचा। यहां से ये किसी बीज में अब उत्तर भारत के राज्यों में भी पहुंच गया है। पिछले दो-तीन साल से प्रदेश में भी ये कीट मक्की को नुकसान पहुंचा रहा है।
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अग्निशस्त्र का प्रयोग करें
अग्निशस्त्र रस चूसने वाले कीड़े, छोटी सुंडियों के लिए उपयोगी है। इसके लिए कूटे हुए नीम के पत्ते एक किलोग्राम, तंबाकू का पाउडर 100 ग्राम, तीखी हरी मिर्च की चटनी 100 ग्राम, देसी लहसुन की चटनी 100 ग्राम सामग्री को पांच लीटर देसी गाय के मूत्र में धीमी आंच पर उबालें। इस मिश्रण को 48 घंटे के लिए रख दें। सुबह शाम दो बार इस घोल को लकड़ी की डंडी से घोलते रहें। इस घोल को 30 से 40 लीटर पानी में मिलाकर प्रति बीघा स्प्रे करें।
- डॉ. पंकज मित्तल, प्रधान कृषि वैज्ञानिक, धौलाकुआं।
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कोराजन से भी बचेगी फसल
किसान फाल आर्मी वर्म नामक कीट को नजरअंदाज न करें। इसके लिए कोराजन कीटनाशक का छिड़काव करें। हालांकि, ये महंगा है लेकिन इसके प्रयोग से फसल को बचाया जा सकता है। अभी ये नहीं कहा जा सकता कि कितना हेक्टेयर फसल इससे प्रभावित हुई है लेकिन कुछ क्षेत्रों से किसानों की शिकायतें मिल रही हैं। अच्छी बारिश के बाद इसका असर खुद कम हो जाएगा।
- डॉ. राजेंद्र सिंह ठाकुर, कृषि उपनिदेशक सिरमौर।