उन्होंने पूछा कि प्रदेश भाजपा के नेता बताएं, वह राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के पक्ष में हैं या नहीं। सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार प्रदेश के लोगों के हितों की लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं की मांग पर सर्वदलीय बैठक का स्थान बदला गया, लेकिन हिमाचल के हितों के लिए भाजपा खड़ी नहीं हुई, जबकि अन्य सभी दलों ने राजस्व घाटा अनुदान पर राज्य सरकार को समर्थन दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में जब उन्होंने भाजपा नेताओं से पूछा कि क्या वह हिमाचल प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान मिलने के पक्ष में हैं, तो उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा। भाजपा नेताओं को प्रदेश को 10 हजार करोड़ रुपये की कटौती का मुद्दा जनता के समक्ष रखना चाहिए। भाजपा नेताओं को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री के पास जाकर राजस्व घाटा अनुदान बहाल कराएं।
सुक्खू ने कहा कि पूर्व सरकार को पांच वर्षों में 70 हजार करोड़ की अतिरिक्त धनराशि मिली, लेकिन उन्होंने इसका सदुपयोग नहीं किया। अगर पूर्व भाजपा सरकार ने इस पैसे का सदुपयोग किया होता तो प्रदेश पर 76 हजार करोड़ का कर्ज और 10 हजार करोड़ की देनदारियां नहीं होतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार ने एक हजार करोड़ के भवन सिर्फ मित्रों को खुश करने के लिए बना दिए, जबकि वर्तमान राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास कर रही है।