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मोबाइल से नजदीकियों ने किताबों से दूर किए बच्चे, ढर्रे पर लौटने में लगेगा वक्त

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हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड की बारहवीं का इतिहास का पर्चा देने के बाद चर्चा करतीं कन्या वरिष्ठ माध? - फोटो : NAHAN
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नाहन (सिरमौर)। कोरोना महामारी के बीच दो साल स्कूल बंद रहने से बच्चों की मोबाइल से नजदीकियां बढ़ गई हैं। लंबे समय तक ऑनलाइन पढ़ाई के चलते बच्चे किताबों से दूर होते गए। अब स्कूल खुले हैं, लेकिन बच्चे पढ़ाई में पिछड़ गए हैं, जिन्हें दोबारा पटरी पर लौटने में वक्त लगेगा। यह बात अभिभावक ही नहीं शिक्षक भी स्वीकार कर रहे हैं।
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जहां तक उपस्थिति की बात है तो ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान कमजोर नेटवर्क और कइयों के पास मोबाइल न होने से भी बच्चे पढ़ाई से अछूते रहे। हालांकि, स्कूल खुलते ही शिक्षकों ने बच्चों की पढ़ाई पर जोर दिया तो अभिभावकों ने भी राहत की सांस ली। स्कूल खुलते ही बच्चों की संख्या भी बढ़ी। बीते माह तक जिले के स्कूलों में 80 फीसदी तक उपस्थिति दर्ज की गई। मौजूदा समय में सिरमौर के स्कूलों में ऑफलाइन परीक्षाएं चल रही हैं। इसके चलते उपस्थिति शत-प्रतिशत हो गई है। कई स्कूल बच्चों की पढ़ाई की कसर पूरी करने के लिए मेहनत भी कर रहे हैं। ताकि, दो साल की क्षतिपूर्ति की जा सके।
क्या कहते हैं बच्चे
1. कैंट स्कूल के 8वीं कक्षा के हिमांशु ने कहा कि कोरोना काल में घर में कैद होकर रह गए थे। स्कूल खुले तो पढ़ने के साथ-साथ खेलने की भी आजादी नसीब हुई।
2. कैंट स्कूल के छात्र विशाल शर्मा ने कहा कि घर में पढ़ाई नहीं होती थी, अब स्कूल खुलने पर पढ़ाई सही तरीके से हो रही है।
3. नाहन में पढ़ रही छठी कक्षा की आरुषि शर्मा ने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई परेशानी भरी थी। आंखों पर बोझ पढ़ रहा था। अब ऑफलाइन पढ़ाई से राहत मिली।
4. छठी कक्षा की वैशाली शर्मा ने कहा कि ऑनलाइन कक्षा के बीच कई बार नेटवर्क गायब हो जाता था। इससे पढ़ाई करना मुश्किल हो रहा था।
5. कन्या स्कूल की मंजूषा शर्मा ने कहा कि स्कूल खुलने के बाद पढ़ाई के साथ-साथ दूसरी गतिविधियों में भी मजा आ रहा है। स्कूल खुले रहने चाहिए।
क्या कहते हैं अभिभावक
6. शोभित गर्ग ने बताया कि उनकी बेटी दूसरी कक्षा में है। घर में रहने से वह पढ़ाई से दूर हो गई। हमारे कहने पर भी ढंग से पढ़ती नहीं थी। स्कूल बंद होने से बच्चों का काफी नुकसान हुआ।
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7. नरेश सैनी ने बताया कि उनका बेटा नर्सरी में है। घर में रहकर शरारती हो गया। स्कूल खुलने से घरवालों को भी राहत मिली है।
8. दीपक चौधरी ने कहा कि उनकी बेटी दसवीं में है। घर में पढ़ाई बिल्कुल नहीं हो रही थी। स्कूल खुले तो पढ़ाई हुई। अब स्कूल खुले रहने चाहिए।
क्या कहते हैं शिक्षक
9. कन्या स्कूल नाहन की शिक्षिका शबनम रहमान ने बताया कि बच्चों को पूरा सिलेबस ऑनलाइन करवा दिया गया था, लेकिन बच्चे पढ़ाई में कमजोर दिख रहे थे। परीक्षाएं नजदीक आते देख सभी शिक्षको नें अपने विषयों के महत्वपूर्ण हिस्से पर फोकस रखा।
10. कैंट स्कूल नाहन की शिक्षिका रूचिका तोमर ने बताया कि फरवरी में 85 प्रतिशत बच्चों ने अपनी उपस्थिति स्कूल में दी। अब परीक्षाओं में सौ फीसदी बच्चे आ रहे हैं। कोरोना काल में हर घर पाठशाला, अभियान के तहत बच्चों को पढ़ाने का पूरा प्रयास किया गया।
11. कैंट स्कूल नाहन की शिक्षिका मोनिका बंसल ने बताया कि स्कूल की एक छात्रा ने आठवीं पूरी करने के बाद पढ़ाई छोड़ी। छात्रा पढ़ाई न छोड़े, इसके लिए अभिभावकों की काउंसलिंग भी की गई, लेकिन बात नहीं बनी। न उन्होंने स्कूल छुड़वाने का कोई कारण ही बताया।
12. नौरंगाबाद स्कूल के मुख्य अध्यापक संजीव अत्री ने बताया कि मोबाइल की नजदीकियों ने बच्चों को पढ़ाई से दूर किया। फिर भी शिक्षकों का यही प्रयास है कि जल्द पढ़ाई के नुकसान की भरपाई हो। इसके लिए विशेष कक्षाएं लगाई जा रही हैं।
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