धार्मिक कट्टरता से दूर रहने का आह्वान, बोलीं-भारत धर्मनिरपेक्ष, हम सब एक
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। आज के दौर में लड़कियां किसी भी लिहाज से पुरुषों से पीछे नहीं हैं। हर क्षेत्र में लड़कियों ने पैठ बनाई हैं। ऐसे में आप जो भी लक्ष्य चुनें उसे ईमानदारी से हासिल करने की सोचें।
नाहन में मेरा युवा भारत के सहयोग से आयोजित अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल कार्यक्रम में आरटीओ नाहन सोना चंदेल ने बतौर मुख्यातिथि ये बात कही। इससे पहले उनके कार्यक्रम में पहुंचने पर जिला युवा अधिकारी माई भारत प्रदीप कुमार, कार्यक्रम एवं लेखा सहायक सुरेंद्र शर्मा ने शॉल टोपी ओढ़ाकर उनको सम्मानित किया।
सोना चंदेल ने लड़कियों के लिए बनी धारणाओं को भी खत्म करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज ने लड़कियों के लिए एक धारणा बना रखी है कि यह कार्य लड़कियां नहीं कर सकतीं। ऐसे में सभी लड़कियां कुछ नया करें, दुनिया के इस मिथक को तोड़ें, मंजिल आपके कदम चूमेगी।
उन्होंने कहा कि पहले कहते थे कि वाहनों को केवल पुरुष चला सकते हैं। अब महिलाएं इस क्षेत्र में बेहतर काम कर रही हैं। वोल्वो बसें तक महिलाएं चला रही हैं। उन्होंने समाज में बढ़ रही धार्मिक कट्टरता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत धर्मनिरपेक्ष देश है। यहां पर सभी एक हैं और इस एकजुटता को बढ़ाने के लिए सभी को कार्य करना चाहिए।
विशेष अतिथि आईटीआई नाहन के प्रधानाचार्य अशरफ अली और जिला युवा अधिकारी प्रदीप कुमार ने भी छात्राओं के कॅरिअर को लेकर सुझाव दिए। अशरफ अली ने कहा कि हमारा समाज के लिए क्या योगदान है, इस सोच को लेकर काम करें। हमें अपनी ओर से समाज की बेहतरी में कुछ न कुछ योगदान जरूर देना चाहिए।
धार्मिक कट्टरता पर किया सचेत
कविता चौहान ने कहा कि महिला सशक्तीकरण के अलावा धार्मिक कट्टरता पर भी सचेत किया गया। ये आज की जरूरत बन गया है, ये देखकर अच्छा लगा।
नया करने के लिए मिली प्रेरणा
रेणुका की सुमन चौहान ने कहा कि अपराजिता कार्यक्रम में जीवन में लीक से हटकर काम करने की प्रेरणा मिली। लड़कियां आज हर क्षेत्र में अच्छा काम कर रही हैं।
प्ररेणादायी रहा कार्यक्रम
नौहराधार की साक्षी ने कहा कि कार्यक्रम बेहद प्रेरणादायी रहा। छात्राओं को कॅरिअर को लेकर अच्छी जानकारी दी गई। इससे भविष्य को संवारने में मदद मिलेगी।
सकारात्मक होगा प्रभाव
सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज की एक जरूरत बन गए हैं। इससे युवाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए।
कविता चौहान। अपराजिता कार्यक्रम
कविता चौहान। अपराजिता कार्यक्रम
कविता चौहान। अपराजिता कार्यक्रम
कविता चौहान। अपराजिता कार्यक्रम
कविता चौहान। अपराजिता कार्यक्रम