अकाल अकादमी बडू साहिब के छोटे बच्चों के साथ बाबा इकबाल सिंह। (फाइल फोटो)
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राजगढ़ (सिरमौर)। एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पद्मश्री बाबा इकबाल सिंह ने खुद को केवल शिक्षा क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रखा। वे सामुदायिक जीवन के हर पहलू में शामिल रहेे।
उन्होंने स्कूल खोले। अस्पताल, कॉलेज, महिला सशक्तीकरण केंद्र और नशामुक्ति केंद्र शुरू किए। बाबा इकबाल सिंह ने टीम के साथ बड़ू साहिब सिरमौर में अकाल चैरिटेबल अस्पताल की स्थापना की, जो समाज के गरीब वर्ग को निशुल्क चिकित्सा दे रहा है। हर साल चिकित्सा शिविर लगाए जाते हैं। यहां मुंबई, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के विशेषज्ञ सेवाएं देते हैं। ग्रामीण परिवेश के गरीब लोगों को मुफ्त सर्जरी समेत मुफ्त चिकित्सा और देखभाल की सुविधा अस्पताल में दी जा रही है। इसके साथ-साथ महिला अधिकारिता कार्यक्रम के तहत वंचित युवतियों का शिक्षा से पुनर्वास किया जाता है और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए रोजगार दिया जा रहा है।
बाबा मानते थे कि समाज के सबसे गरीब, उत्पीड़ित और पिछड़े वर्गों के लिए अथक रूप से काम करने में समाज में वास्तविक योगदान होता है। बाबा इकबाल सिंह ने 6 साल की उम्र में फैसला लिया था कि वे केवल मानवता की सेवा करेंगे। उन्होंने शिक्षा से वंचित बच्चों को शिक्षित किया और अपने धर्मार्थ संस्थान कलगीधर ट्रस्ट सिरमौर में हजारों मरीजों का इलाज करवाया। ग्रामीण भारत में मूल्य-आधारित शिक्षा प्रदान करने के लिए उन्होंने अथक प्रयास किए। ताकि प्रत्येक ग्रामीण बच्चे को कम लागत वाली मूल्य-आधारित शिक्षा प्राप्त हो सके।