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बाराती बनकर गए 11 अभागे नहीं लौटे घर

Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
Sirmour
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शिलाई (सिरमौर)। शनिवार 10 बजे सुबह यूटीलिटी बकरास से चली बताई गई। इसमें 30 से अधिक सवारियां थीं। बसोग मोड़ से दुर्घटनास्थल पर प्रत्यक्षदर्शी सुंदर सिंह का कहना है कि जैसे ही गाड़ी सड़क से बाहर गई तो वहां पर किलकारियां ही किलकारियां सुनाई देने लगी।
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दुर्घटना इतनी जोरदार हुई कि गाड़ी के दो टुकड़े हो गए। आस पड़ोस के बसोग निवासी दुर्घटनास्थल की और दौड़े और गहरी खाई से घायलों को बाहर निकाला। जब तक कि कुछ सहायता दी जाती, तब तक मरने वालों की संख्या 8 हो चुकी थी। बामल निवासी कंवर सिंह और उसकी पत्नी कमला देवी अपने एक बच्चे के साथ रिश्तेदारी में क्यारी गुंडाह गए थे। लेकिन कमला देवी और उसके पति कंवर सिंंह की इस दुर्घटना में मौत हो गई। जबकि उनकी 6 वर्षीय बच्ची मम्मी पापा कह कर विलाप कर रही है। देखने वाली बात यह है कि पांच सीट की क्षमता पास होने के बावजूद भी इस यूटीलिटी में 30 से अधिक सवारियां मोटर वाहन अधिनियम पर भी प्रश्न चिन्ह लगा रही है।
एसडीएम पांवटा ने भले ही जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन मरने वालों की जिंदगी तो वापस नहीं लौटाई जा सकती। मरने वालों में क्यारी गुंडाह के दो छात्र नीमा व कपिल दोनों चचेरे भाई बहन थे। इस घटना से पूरे जेलभोज में शोक की लहर है। साथ ही एक दर्जन से ज्यादा घायल जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
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स्थानीय विधायक हर्षवर्धन चौहान, भाजपा के जिला अध्यक्ष एवं शिलाई से पार्टी प्रत्याशी बलदेव तोमर, जिला परिषद सदस्य रणजीत नेगी, जिला परिषद सदस्य दलीप चौहान ने इस घटना पर गहरा शोक प्रकट किया।
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