शिलाई (सिरमौर)। एशिया में अदरक से निर्मित सौंठ के लिए बेला घाटी के किसान इन दिनों सूखे के चलते अपने अदरक के लिए चिंतित है। सौंठ की गुणवत्ता के लिए अदरक की गांठों के अंदर रेशा होना अनिवार्य है। रेशा इन दिनों तभी बनता है या अदरक की सिंचाई हो या इन दिनों खूब बारिश हो। हालांकि मौजूदा समय में न तो बारिश हो रही है और न ही खड्डों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी है। ऐसे में किसानोें को चिंता सता रही है।
बेला घाटी के 25 गांवों के किसान अदरक को अपनी मुख्य नगदी फसल के तौर पर उगाते हैं। आजकल इसके लिए सिंचाई की बेहद आवश्यकता है। घाटी के किसान चंदन सिंह, उत्तम सिंह नेगी, भजूराम, अमर सिंह, रतन सिंह, खजान सिंह, रमेश कुमार, बिशन सिंह और टीकम सिंह का कहना है कि इस वर्ष बारिश कम होने के कारण जलस्रोत में जल स्तर कम है। जो सिंचाई के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में अदरक विकसित नहीं हो पा रहा है। जिससे सौंठ की गुणवत्ता में कमी आएगी और किसानों को अच्छे दाम नहीं मिलेंगे। यदि जल्द बारिश न हुई तो बेला घाटी के किसानोें को लाखोें की क्षति होगी।
वहीं इस संबंध में सह कृषि विकास अधिकारी शिलाई डा. बलबीर सिंह चौधरी ने बताया कि सौंठ की अच्छी गुणवत्ता के लिए सिंचाई आवश्यक है। किसान इन दिनों में खेतों में नमी बनाए रखने के लिए विशेष ध्यान रखें, जितना हो सके खेतों की सिंचाई करें।