नाहन (सिरमौर)। डॉ. यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज नाहन में तमाम सुविधाएं जुटाने के राजनीतिक वादे और सरकारी दावे धरातल पर धराशायी हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए पहुंचने वाले लोगों का मर्ज दूर नहीं हो रहा। कॉलेज में डायलिसिस तो दूर लैप्रोस्कोपी तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहीं, करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया ऑक्सीजन प्लांट अभी तक शुरू नहीं हो पाया। शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज का औचक निरीक्षण करने पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने भी मेडिकल कॉलेज में लैप्रोस्कोपी की सुविधा जुटाने पर बल दिया। सिरमौर में केंद्र सरकार ने मेडिकल कॉलेज की सौगात दी है। लोगों को उम्मीद थी कि मेडिकल कॉलेज बनने के बाद यहां बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। लेकिन, हालात पहले से भी कहीं अधिक खराब हो गए हैं। मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल में लगी पुरानी एवं आउटडेटिड मशीनरियों के सहारे चल रहा है। सीटी स्कैन बार-बार खराब हो जाती है, जबकि सात-सात सर्जन होने के बावजूद यहां पर मशीन के अभाव में लैप्रोस्कोपी की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई। गायनी विशेषज्ञों की कमी के कारण महिलाएं बिना चेकअप वापस लौट रहीं है। कुछ अरसे पहले ही कॉलेज में करोड़ों रुपये खर्च कर ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है। इसके बाद कॉलेज के हर वार्ड में ऑक्सीजन की बेहतरीन सुविधा मिल सकेगी। लेकिन, स्टाफ के अभाव में इसे शुरू तक नहीं किया जा सका है।
इंसीनेटर खराब, बाहर जा रहा मेडिकल बेस्ट
नाहन मेडिकल कॉलेज में जिला अस्पताल के समय से इंसीनेटर लगाया गया है। लाखों रुपये की लागत से बना इंसीनेटर अब खराब हो गया है। इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा। कॉलेज से निकलने वाले मेडिकल बेस्ट को ठिकाने लगाने का कार्य अनुबंध पर कंपनी को दिया गया है। कंपनी ही मेडिकल बेस्ट का निष्पादन कर रही है।
क्या कहते हैं अधिकारी
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके पराशर का कहना है कि ऑक्सीजन प्लांट बनकर तैयार हो गया है। इसके लिए हमें स्टाफ की आवश्यकता है। सरकार ने सात कर्मचारियों को रखने की अनुमति दी है। आउटसोर्स के तहत कर्मचारियों की नियुक्ति के बाद इसे शुरू किया जाएगा। जबकि लैप्रोस्कोपी की सुविधा जुटाने को भी प्रयास किए जाएंगे। फिलहाल कॉलेज में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है जबकि डायलिसिस मशीन लगाने के लिए सिविल वर्क चल रहा है। डीआरडीए को यह कार्य दिया गया है। कार्य पूरा होते ही इसकी भी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।