अमर उजाला ब्यूरो
ददाहू (सिरमौर)। ददाहू-संगड़ाह मार्ग पर खड़कोली में हुए स्कूल बस हादसे के बाद अब स्कूल प्रबंधन की लापरवाही सामने आने लगी है। सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाली पोस्ट सामने आई है। दिसंबर 2017 में एक युवक ने फेसबुक पर डाली पोस्ट में साफ लिखा है कि बच्चों को स्कूल से ले जाने और पहुंचाने में लापरवाही बरती जाती थी। स्कूल बस अक्सर खराब रहती थी। कभी-कभार तो अंधेरा हो जाने तक बच्चे घर पहुंचते थे। पोस्ट में बाकायदा वीडियो भी डाला गया है। इसमें एक बच्चे को अंधेरा होने के कारण बस के भीतर ही सोते हुए दिखाया गया है। अब सवाल यह उठ रहे हैं कि यदि उस वक्त बस की सही तरीके से मरम्मत करवा ली गई होती और नियमों की अवहेलना न होती तो शायद हादसा न होता।
बस हादसे के बाद युवक ने पुन: एक पोस्ट डालते हुए बाकायदा पुरानी पोस्ट का लिंक भी अपलोड किया है। हालांकि, स्कूल प्रबंधन बस दुरुस्त होने की दुहाई दे रहा है, लेकिन अभिभावकों ने दुर्घटना वाले दिन ही बस बार-बार खराब रहने की बात कही थी। उधर, एसडीएम संगड़ाह राजेश धीमान ने मजिस्ट्रेट जांच शुरू कर दी है। सोमवार को उन्होंने दुर्घटनास्थल का दौरा किया और बारीकी से दुर्घटनाग्रस्त बस की जांच की। इस दौरान उन्होंने इलाके में लोगों के बयान भी दर्ज किए। उन्होंने कहा कि जांच आरंभ की गई है। 15 दिन के भीतर इसे उपायुक्त को सौंप दिया जाएगा। उनके अनुसार फेसबुक पर डाली गई पोस्ट उनके ध्यान में है। इस बिंदु पर भी जांच केंद्रित की जाएगी।
क्या लिखा था 2017 की पोस्ट में
एक दिसंबर 2017 को पोस्ट डालने वाले युवक ने शाम के समय इस बस में लिफ्ट ली थी। पोस्ट के मुताबिक कड़ाके की ठंड में 27 किलोमीटर दूर तीन से 10 साल के मासूमों को घर पहुंचना था। बताया गया कि टायर पंक्चर होने के कारण बस देरी से पहुंची। स्कूल प्रबंधन ने बच्चों की सहूलियत के लिए दूसरी बस का इंतजाम करना मुनासिब नहीं समझा। सर्द दिनों में जल्द अंधेरा हो जाता है। सफर के दौरान बस की हेडलाइट नहीं जल रही थी। मासूम बच्चे लटक-लटक कर सो रहे थे। बस में कोई अटेंडेंट भी नहीं था। चालक को हेडलाइट के बगैर बस चलानी पड़ रही थी, साथ ही देरी की वजह से अभिभावकों के फोन भी सुनने पड़ रहे थे।
पुरानी पोस्ट का लिंक डाला और यह लिखा
मैं अथाह दिल से दुख सहने वालों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। प्रभु किसी को ऐसा दिन न दिखाए और जो लोग आज इस दुख को सहने के लिए मजबूर हैं, उन्हें और उनके परिजनों को सहने की सामर्थ्य प्रदान करे। मैं इस समय गहरे मातम पर किसी के घाव नहीं कुरेदना चाहता लेकिन यह भी सच्चाई है कि कोई भी बात का महत्व आसानी से तभी समझ आता है जब वह घट जाती है। आज से लगभग एक वर्ष पहले (01/12/217) को मैंने इसी स्कूल बस के बारे में एक पोस्ट डाली थी। यह बस पुरानी और अक्सर खराब रहती थी। पीछे वाली सीटें तो बैठने योग्य भी नहीं थीं।