प्री मैच्योर बच्चों को पांवटा में मिल रहा नया जीवन
एकमात्र एसएनसीयू में मिल रहीं बेहतर सुविधाएं
पांवटा साहिब (सिरमौर)। सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में एकमात्र स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) नवजात बच्चों के लिए वरदान साबित हो रहा है। प्री मैच्योर प्रसव से हो रहे बच्चों को भी इस यूनिट में नया जीवन मिल रहा है। उत्तराखंड से एक ऐसा ही मामला यहां पहुंचा है। गंभीर अवस्था में पहुंची केवल आठ सौ ग्राम वजन की नवजात बच्ची को मशीन में रखा गया। विशेषज्ञ टीम की देखभाल के बाद अब बच्ची स्वस्थ है। एक बच्ची को पहले ही खो चुके दंपती के चेहरे पर उम्मीद की नई किरण नजर आई। उत्तराखंड के सेलाकुई निवासी दंपती वेद प्रकाश और डिंपल (22) ने कहा कि एसएनसीयू पांवटा वरदान साबित हुआ है। पिछले महीने सेलाकुई मेडिकेयर में जुड़वा बच्ची हुई थी। दोनों का वजन बेहद कम था। दो सप्ताह दून अस्पताल में रहे। रोज बाहर से मंगवाई जाने वाली दवाइयों का हजारों रुपये खर्च आता था। दोनों नवजात को घर ले गए। तीसरे दिन एक बच्ची की मौत हो गई। दूसरी की हालत काफी खराब थी। डिंपल ने कहा कि वह अपनी मां के पास पांवटा आई थी। बीमार नवजात बच्ची का वजन मात्र आठ सौ ग्राम है और वह मां का दूध भी नहीं पी रही थी। सिविल अस्पताल पांवटा में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमिताभ जैन से स्वास्थ्य जांच करवाई। चिकित्सक ने तुरंत अस्पताल के एसएनसीयू में भेज दिया। अस्पताल में तमाम इलाज मुफ्त चल रहा है। बच्ची का वजन 1.150 ग्राम हो चुका है। मशीन में रखी नवजात ने मां का दूध पीना शुरू कर दिया। बच्ची के स्वस्थ होने पर अभिभावकों के चेहरे पर रौनक लौट आई है। उधर, सिविल अस्पताल पांवटा के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमिताभ जैन ने कहा कि गंभीर हालत में उत्तराखंड से नवजात बच्ची पहुंची थी। जिले के एकमात्र एसएनसीयू सुविधा केंद्र पांवटा अस्पताल में अब वह स्वास्थ्य लाभ ले रही है। हर माह जिले से करीब एक दर्जन ऐसे मामले यहां पहुंच रहे हैं। पहले ऐसे बच्चों को पीजीाई भेजा जाता था। अब सिर्फ वेंटिलेटर की सुविधा की जरूरत होने पर ही बच्चों का यहां से रेफर किया जाता है।
एक मात्र एसएनसीयू में विशेष सुविधाएं
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमिताभ जैन ने कहा कि सिरमौर में एकमात्र एसएनसीयू पावंटा अस्पताल में है। इसमें एसी कक्ष, कंगारु मदर केयर, वारमर्र, फोटो थैरेपी, एलईडी/सीएफएल, मॉनीटर, सी-पेप मशीन, सेंटर लॉक और केएमसी रूम की सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध करवाई जा रही हैं। शिमला से प्रशिक्षित पांच स्टॉफ नर्सों को तैनात किया गया है।