ददाहू (सिरमौर)। 60 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाले गिरि पावर हाउस में बिजली उत्पादन 36 मेगावाट रह गया है। गिरि नदी में भारी सिल्ट आने के कारण उत्पादन घट रहा है। हालांकि, गर्मियों की अपेक्षा उत्पादन में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन सिल्ट की वजह से क्षमतानुसार जितना उत्पादन होना चाहिए, उसमें भारी कमी आ रही है।
गिरि पावर हाउस में शत-प्रतिशत उत्पादन के लिए 40 क्यूमेक्स पानी की आवश्यकता रहती है। बरसात के समय गिरि पावर हाउस का उत्पादन शतप्रतिशत रहता है। अभी पानी का स्तर 15 से बढ़कर 27 क्यूमेक्स पर टिका हुआ है। दोनों टरबाइनों से 14 से 19 घंटों के बीच बराबर काम लिया जा रहा है। बीते वीरवार से ही उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है। यदि बारिश अधिक होती है तो शत-प्रतिशत 60 मेगावाट तक उत्पादन पहुंचने का अनुमान है। उत्पादन में हुई थोड़ी बढ़ोतरी के चलते गिरी पावर हाउस के अधिकारियों ने भी राहत महसूस की है। जून माह में उत्पादन क्षमता घटकर 18 मेगावाट तक पहुंच चुकी थी, जो परियोजना के लिए भारी घाटे का सौदा साबित हो रही थी।
मानसून की पहली बारिश ने गिरि पावर हाउस की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। शुक्रवार को बारिश के दौरान गिरि नदी में भारी सिल्ट आने के चलते मशीनों को 4 से 5 घंटे के लिए बंद रखना पड़ा। एक ही दिन में 5500 पीपीएम से अधिक सिल्ट जमा हो गई। इसे साफ करने में कई घंटों का समय लग गया। लिहाजा, 4 से 5 घंटे मशीनों को बंद रखना पड़ा। ऐसे में मशीनों के जाम होने का खतरा बना रहता है। यदि परियोजना प्रबंधकों की मानें तो यह सिल्ट गिरि नदी के पानी में बहकर आने से जमा हुई है, लेकिन गिरि नदी के सीने पर आज भी हजारों टन मिट्टी व मलबे को बेरोकटोक फेंका जा रहा है। यह सिल्ट का सबसे अहम कारण भी है। गिरि नदी के तट पर लगे मलबे के सैकड़ों ढेर बारिश के पानी के साथ बहकर जटोन बैराज में समा रहे हैं।
उधर, आरई रणधीर ठाकुर ने बताया कि बांध परियोजना में 5500 पीपीएम सिल्ट जमा हो गई थी। इसे साफ करने के लिए 5 घंटे तक मशीनों को बंद रखना पड़ा। सिल्ट रोकने का कोई विकल्प नहीं है। पिछले 2 दिन में उत्पादन 36 मेगावाट पर टिका हुआ है।