ट्रांसगिरी क्षेत्र में मनाए जाने वाले माघी त्योहार में इस बार भी हजारों बकरों की बलि चढ़ेगी। धार्मिक आस्था से जुड़ा यह त्योहार पौष माह के 28 गते को मनाया जाता है। इस दिन बकरों की बलि से पहले काली मां के नाम का प्रसाद बनाकर पूजा की जाती है। यह त्योहार उत्तराखंड के जोनसार बाबर में भी मनाया जाता है।
ट्रांसगिरी क्षेत्र की 70 से अधिक पंचायतों के 40 हजार परिवार यह त्योहार मनाते हैं। इसमें करोड़ों रुपये के बकरों की बलि चढ़ेगी। हर परिवार अपने आंगन में बकरे की बलि देता है। कुछ परिवार सुअर की बलि भी चढ़ाते हैं। कुंदन सिंह, रामलाल, रजनीश चौहान, कुलदीप शर्मा, बलबीर सिंह, दया राम शर्मा आदि ने बताया कि त्योहार के पहले दिन घरों में पकवान बनाए जाते हैं जिसे बोशता कहते हैं। 28 गते बकरे की बलि चढ़ती है।
माघी को कई क्षेत्रों में भातियोज भी कहते हैं। मकर संक्रांति से पहले एक दो दिन तक साजा मनाया जाता है। इस परंपरा को तोड़ने के लिए सिरमौर हाटी कर्मचारी संघ ने विजन डाक्यूमेंट लागू किया इसके बावजूद यह परंपरा नहीं टूटी। क्षेत्र में कुछ ग्रामीण एक दो दिन पहले ही बकरे काट देते हैं। भाई अपनी बहन को त्योहार देते हैं जिसमें वह आटा और चावल ले जाता है।