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सरकार 12 साल में तैनात कर पाई सिर्फ 32 उर्दू अध्यापक

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अमर उजाला ब्यूरो
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नाहन (सिरमौर)।
प्रदेश सरकार के उदासीन रवैये के कारण उर्दू भाषा का वजूद खत्म होता जा रहा है। सरकार ने 26 दिसंबर 2006 को अधिसूचना जारी कर सरकारी स्कूलों में 100 उर्दू भाषा अध्यापकों की नियुक्तियां करने की स्वीकृति प्रदान की थी। भारत सरकार ने इसके लिए वर्ष 2007-2008 में 83.20 लाख रुपये का प्रावधान भी किया था लेकिन सरकार 12 सालों में मात्र 32 उर्दू भाषा के अध्यापकों की ही नियुक्ति दे पाई है। यह बात ऑल हिमाचल मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष नसीम मोहम्मद दीदान ने एक प्रेस बयान में कही।
दीदान ने कहा कि अध्यापकों की नियुक्ति में इतनी धीमी प्रक्रिया कहीं न कहीं पक्षपात की ओर इशारा कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा भर्ती किए गए 32 उर्दू अध्यापकों में से भी 21 उर्दू अध्यापक हिंदू समुदाय से हैं। जबकि 11 अध्यापक ही ऐसे हैं जो मुस्लिम समुदाय से हैं।
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दीदान ने कहा कि इस समय मंडी में 16, सिरमौर में 7, शिमला में 9, कांगड़ा में 3, ऊना में 10, चंबा में 4, बिलासपुर में 11, हमीरपुर में 4 और किन्नौर में 4 पद उर्दू अध्यापकों के रिक्त पड़े हुए हैं। जबकि इन अध्यापकों की तैनाती होने पर स्कूलों में छठीं से 10वीं कक्षा तक विद्यार्थियों को उर्दू पढ़ाई जानी थी। दीदान ने बताया कि इस संदर्भ में उन्होंने शिक्षा मंत्री को पत्र भी भेजा है जिसके माध्यम से प्रदेश में 68 उर्दू अध्यापकों की तैनाती करने की मांग की गई है।
 
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