फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेडिकल कालेज में इलाज तो दूर, नंबर लगाना भी मुश्किल

विज्ञापन
Hospital
विज्ञापन
हितेश शर्मा
विज्ञापन

नाहन (सिरमौर)।
समय दोपहर 12 बजकर 6 मिनट। ‘अमर उजाला’ टीम पहुंची मेडिकल कॉलेज। सबसे पहले टीम ने मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाएं जांचने के लिए गायनी ओपीडी का दौरा किया। देखा तो दर्जनों महिलाएं ओपीडी के बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं। भीड़ इतनी की रास्ते से गुजरना भी मुश्किल। और यह इंतजार सिर्फ शुक्रवार को पर्ची बनाने के बाद का नहीं है। इंतजार है पिछले तीन से चार दिनों का।

कब जांच की बारी आएगी। कुछ महिलाएं बैंच पर बैठी हैं तो कई ओपीडी के बाहर खड़ीं। चारों तरफ से दरवाजे को घेर कर अंदर से मरीज का नाम घोषित होने का इंतजार कर रही हैं। पूछताछ पर यह पता चला कि एक दिन में सिर्फ 25-30 महिलाओं की ही स्वास्थ्य जांच होती है। इसके बाद दूसरी महिलाओं का नंबर अगले दिन ही आ पाता है। कई बार अगले दिन भी नंबर पड़ना संभव नहीं है।
विज्ञापन


इधर-उधर बैठी महिलाओं की फोटो क्लिक करते समय पीछे से आवाज आई कि यह फोटो क्यों ली जा रही हैं। ड्यूटी पर तैनात नर्स ने कहा कि पहले परमिशन लेनी चाहिए। बहरहाल, फोटो क्लिक की जा चुकी थी। इसके बाद सीधा पहुंचे एमएस ऑफिस। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. केके पराशर ने बताया कि यह सही है कि एक दिन में सिर्फ 25-30 महिलाओं की जांच ही हो पाती है। दो गायनी स्पेशलिस्ट छुट्टी पर चल रहे हैं। जबकि अभी दो ही विशेषज्ञ डॉक्टर ड्यूटी दे रहे हैं। इनमें से भी एक की ड्यूटी कई बार इमरजेंसी में होती है तो ओपीडी में मरीजों के देखने के लिए एक विशेषज्ञ ही ड्यूटी दे रहा है।

बाक्स---
सिर्फ एक चाइल्ड स्पेशलिस्ट के सहारे ओपीडी
नाहन अस्पताल में मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिल गया है लेकिन अभी भी एक ही चाइल्ड स्पेशलिस्ट के सहारे पूरी ओपीडी है। दर्जनों अभिभावक अपने बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। एक ही विशेषज्ञ डॉक्टर पिछले लंबे अरसे से इमरजेंसी में आने वाले केस भी देख रहे हैं और ओपीडी का जिम्मा भी संभाल रहे हैं।

सीटी स्कैन मशीन बंद--
पिछले एक सप्ताह से सीटी स्कैन मशीन बंद पड़ी है। सैकड़ों मरीज मेडिकल कॉलेज के चक्कर काट रहे हैं लेकिन मशीन के बंद होने से मरीजों को इसकी सुविधा नहीं मिल रही। बताया जा रहा है कि सीटी स्कैन मशीन पुरानी हो चुकी है। लिहाजा, सीटी स्कैन बंद किए गए हैं। इससे भी मरीजों को भारी असुविधाएं झेलनी पड़ रही हैं।
विज्ञापन


स्टाफ का भारी टोटा--
मेडिकल कॉलेज नाहन में दूसरा बैच बैठ चुका है लेकिन जहां तक मरीजों की सुविधाओं का सवाल है तो कॉलेज की स्थिति सिविल अस्पताल से भी बदतर है। कॉलेज मरीजों को सिर्फ रेफर करने तक ही सीमित है। मेडिकल, पैरामेडिकल स्टाफ में कमी के साथ-साथ प्रोफेसरों, सीनियर व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के पद भी रिक्त चल रहे हैं। प्रोफेसरों के कॉलेज में 13 पद स्वीकृत हैं। जबकि, 4 खाली चल रहे हैं। एसोसिएट प्रोफेसरों के 19 में से 9, असिस्टेंट प्रोफेसरों से 31 में से 28, सीनियर रेजिडेंट के 18 में से 11 व जूनियर रेजीडेंट के 47 में से 11 पद भरे हुए हैं।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें