अमर उजाला ब्यूरो
संगड़ाह (सिरमौर)।
जम्मू-कश्मीर व हिमाचल में इस बार लहसुन की बंपर फसल होने से दामों में भारी गिरावट आ गई है। प्रदेश के सिरमौर जिले में लहसुन का सबसे अधिक उत्पादन होता है। सिरमौर के बाद कुल्लू जिले में भी लहसुन की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इसके अलावा सोलन व शिमला जिलों में भी लहसुन की पैदावार की जा रही है। सिरमौर व सोलन जिलों में मई में ही लहसुन की फसल तैयार हो जाती है।
जिले में सबसे पहले फसल तैयार होने के कारण शुरू में किसानों को इसका भारी फायदा मिलता है। सीजन के शुरूआत में सिरमौर जिले का लहसुन दक्षिण भारत की मंडियों में 9 हजार से 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था लेकिन श्रीनगर व कुल्लू का लहसुन मंडियों में पहुंचने से अब लहसुन के दामों में भारी गिरावट आ गई है। लहसुन के दाम घट कर 2 हजार से 6 हजार रुपये क्विंटल तक पहुंच गए हैं। ऐसे में पिछले 4 वर्षों के दौरान इस साल लहसुन के दामों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
पिछले वर्ष लहसुन के दामों ने 15 हजार का आंकड़ा छू लिया था। दो सप्ताह पहले 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाला 4ए ग्रेड के लहसुन का दाम घटकर 6 हजार पर पहुंच गया है। ट्रिपल ए ग्रेड 5500, डबल ए ग्रेड 5 हजार, मीडियम ग्रेड 3 हजार व गोली के आकार के लहसुन के दाम घटकर 2 हजार रुपये पहुंच गए हैं। दामों में आई भारी गिरावट के कारण किसानों को जहां भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है वहीं व्यापारियों के लिए भी लहसुन का व्यापार घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
बता दें कि प्रदेश में सोलन मंडी के बाद हरिपुरधार में लहसुन का सबसे अधिक कारोबार होता है। यहां पर बीज के लिए श्रीनगर व कुल्लू के लहसुन की भारी डिमांड रहती है लेकिन इस बार किसानों को लहसुन के वाजिब दाम न मिलने से उत्पादकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
उधर, लहसुन के मशहूर व्यापारी सुखराम शर्मा ने बताया कि उनके पास श्रीनगर से 18 मीट्रिक टन लहसुन पहुंच गया है। गिरिपार क्षेत्र में बीज के लिए श्रीनगर व कुल्लू के लहसुन की काफी मांग रहती है। इस बार क्षेत्र में लहसुन की बंपर फसल होने के कारण बाहरी राज्यों के लहसुन की मांग कम हो गई है।