अमर उजाला ब्यूरो
पांवटा साहिब (सिरमौर)।
मैदानी क्षेत्रों में प्रचंड गर्मी की तपिश से नौनिहालों का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा है। जैसे-जैसे पारा बढ़ने लगा है, अस्पताल में बच्चों की संख्या में भी इजाफा होने लगा है। सिविल अस्पताल पांवटा में रोजाना 150 से अधिक बच्चे उनके अभिभावक लेकर पहुंच रहे हैं। वायरल फीवर की चपेट में आने के साथ-साथ बच्चों में उल्टी, दस्त व खांसी की शिकायत भी आम है। दिन के समय तेज धूप होने से नकसीर चलना, सिर चकराना व सिरदर्द के मामले भी बढ़ने लगे हैं।
पांवटा क्षेत्र में पिछले सप्ताह से तापमान 35 से 38 डिग्री के आसपास पहुंच रहा है। पारा 40 के पार जाने से लू का भी खतरा भी बढ़ रहा है। इससे बच्चे हीट स्ट्रॉक की चपेट में आ सकते हैं। वहीं, दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली बच्चों एवं पैदल चलने वाले राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
पांवटा दून के मैदानी क्षेत्रों, भगानी, राजबन, माजरा, धौलाकुआं व गिरिपार सतौन, कमरऊ, चांदनी, कठवार, पौका व कफोटा क्षेत्रों से दर्जनों बच्चे अभिभावकों के साथ उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। उधर, सिविल अस्पताल पांवटा के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमिताभ जैन ने बताया कि इन दिनों रोजाना 150 से अधिक छोटे बच्चे ओपीडी में पहुंच रहे हैं। गर्मियों के मौसम में हर वर्ष बीमार होने वाले छोटे बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी होती है लेकिन अभिभावकों को ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है। अभिभावक बच्चों के खानपान पर नजर रखें। अधिक गर्मी होने पर दोपहर को बाहर न निकलें। लू, गर्म हवाओं से बचें। ताजा व पोषक खाना खाएं।
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हीट स्ट्रॉक से ऐसे करें बचाव
सिविल अस्पताल पांवटा प्रभारी डॉ. संजीव सहगल ने बताया कि गर्मियों में हीट स्ट्रॉक की संभावनाएं रहती हैं। तेज धूप व लू लगने की वजह से अकसर ऐसा होता है। हीट स्ट्रॉक में मरीज को तेज सिर दर्द-चक्कर आना, अचानक दौरा पड़ना, आंखों से धुंधला सा दिखना, बुखार की तरह शरीर का तपना, ब्लड प्रेशर कम होना आदि हीट स्ट्रॉक के लक्षण हैं। हीट स्ट्रॉक होने पर गर्मी में बाहर कम निकलें। बाहर जाते समय मुंह व सिर पर कपड़ा लपेटें। ऐसे में ताजा व शुद्ध पानी अधिक पीयें, लस्सी, नींबू पानी व ग्लूकोस का सेवन फायदेमंद रहता है।