अमर उजाला ब्यूरो
शिलाई (सिरमौर)। अपना न्यायिक कोर्ट होने पर भी शिलाई क्षेत्र की जनता पांवटा उपमंडल के चक्कर काटने के लिए मजबूर है। लिहाजा, लोगों का समय के साथ-साथ धन भी बर्बाद हो रहा है। वर्ष 1987 में शिलाई के लिए कोर्ट नंबर दो मंजूर हुआ था। हैरानी की बात है कि तीन दशकों से कोर्ट नंबर दो शिलाई में शिफ्ट नहीं हो पाया। जबकि, न्यायालय भवन बनाने के लिए बजट का प्रावधान भी किया था। शिलाई की जनता 16 सितंबर 2011 को अपनी इस मांग के लिए सड़कों पर भी उतरी थी। उस समय सरकार ने शिलाई में कोर्ट जल्द शुरू करने का सिर्फ आश्वासन दिया। वर्ष 2012 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने पांवटा में चल रहे ज्यूडिशियल कोर्ट नंबर दो को शिलाई स्थानांतरित करने के निर्देश दिए थे। साथ ही यह भी कहा था कि जब तक कोर्ट का अपना भवन नहीं बनता है, तब तक किसी अन्य भवन में कोर्ट चलाने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। दिसंबर 2012 में सत्ता परिवर्तन हुआ और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी। इसके बाद भी लोगों में कोर्ट को लेकर उम्मीद जगी। लेकिन, इन पांच वर्षों में कोर्ट के लिए भूमि का चयन तक नहीं हो पाया। शिलाई पंचायत के प्रधान देवेंद्र धीमान, पूर्व प्रधान रक्षा नेगी, अमर सिंह नेगी, जगपाल तोमर सहित शिलाई के लोगों ने बताया कि शिलाई में कोर्ट के लिए भूमि पर्याप्त मात्रा में मौजूद है। कहीं पर भी कोर्ट परिसर का निर्माण किया जा सकता है।
प्रशिक्षण व्यवस्था को लेकर चर्चा
राजगढ़ (सिरमौर)। भारत स्वाभिमान न्यास की जिला स्तरीय बैठक हिमाचल, पंजाब और चंडीगढ़ के प्रभारी लक्ष्मीदत्त शर्मा की अध्यक्षता में हुई। इस दौरान योग प्रशिक्षक, संगठन निर्माण, तहसील समिति निर्माण, 200 योग की नियमित कक्षाएं चलाने के लिए योग प्रशिक्षकों के चयन और उनके प्रशिक्षण व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई। लक्ष्मीदत्त शर्मा ने समस्त पदाधिकारियों को योगमय भारत निर्माण में योगदान देने का बल दिया। बैठक में मंडल प्रभारी कृष्णदत्त शर्मा, भारत स्वाभिमान न्यास के जिला प्रभारी ओमप्रकाश शर्मा, संयोजक जगदीश वर्मा, पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी सूरजपाल ठाकुर, महामंत्री अरुणदेव वशिष्ठ, किसान परिषद के प्रभारी लक्ष्मीनंद शर्मा, कार्यालय प्रभारी कमला सूद और संगठन सचिव बाबूराम ठाकुर भी उपस्थित थे।