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संसद में किसी नेता ने नहीं उठाए कारोबारियों के मुद्दे

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अमर उजाला ब्यूरो
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लोकसभा चुनाव को लेकर अगली सरकार से कारोबारियों को क्या उम्मीदें हैं, इसको जानने के मकसद से अमर उजाला कार्यालय नाहन में शहर के कारोबारियों से संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पार्किंग, पर्यटन विकास, व्यापारियों की सामाजिक सुरक्षा और कारोबार बढ़ाने के लिए पर्याप्त सुविधाएं जुटाने जैसे कई ज्वलंत मुद्दे सामने आए। कारोबारियों ने कहा कि अब तक सरकार चाहे किसी भी दल की रही हो, कारोबारियों की समस्या को किसी ने संसद तक नहीं पहुंचाया। जीएसटी के फायदे और नुकसान पर भी कारोबारी खुलकर बोले।
नाहन (सिरमौर)। नाहन के कारोबारियों का कहना है कि उनका कारोबार स्थानीय लोगों पर ही निर्भर है। कारोबार बढ़ाने के लिए शहर में बाहर के लोगों की आवाजाही को बढ़ाना होगा। इसके लिए यहां जरूरी मूलभूत सुविधाएं जुटाने के साथ ही नए संस्थान खोलने होंगे लेकिन, ऐसा नहीं हो रहा। कारोबारियों का कहना है कि रियासतकालीन फाउंडरी खंडहर बन गई है। यहां के लिए मिली आईटीबीपी की बटालियन, स्टील प्लांट, मिनी टूल रूम सेंटर राजनीतिक खींचतान की वजह से दूसरे राज्यों को शिफ्ट हो गए। कभी कारोबार के लिए पहले पायदान पर रहने वाला नाहन आज टॉप टेन में भी शुमार नहीं है। पर्यटन को विकसित करने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाए गए। शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद ने कारोबारियों की समस्याओं को संसद तक नहीं पहुंचाया। चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल का क्यों न रहा हो? चंडीगढ़, विकासनगर, नारायणगढ़ यहां से नजदीक हैं। लिहाजा, बड़ी शॉपिंग के लिए लोग इन शहरों का रुख करते हैं। पार्किंग की सुविधा नहीं होने की वजह से लोग यहां बाजार में खरीददारी की बजाय ऐेसे शहरों में जा रहे हैं जहां पार्किंग आदि की बेहतरीन सुविधा है। कॉलेज शहर से बाहर जाने की वजह से भी कारोबार प्रभावित हो गया है। जीएसटी को बेहतर कदम बताते हुए कारोबारियों ने इसे भरने की प्रक्रिया को जटिल बताया। कहा कि कारोबारी सीए पर निर्भर हो गए हैं। इससे छोटे कारोबारियों का कारोबार प्रभावित हुआ है।
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यह है कारोबारियों/ दुकानदारों के मुख्य मुद्दे
-रियासतकालीन फाउंडरी बनी खंडहर। खाली पड़ी कई हेक्टेयर जमीन पर संस्थान खोलकर कारोबारियों को राहत पहुंचाई जा सकती है।
-शहर में पार्किंग की बेहतर व्यवस्था नहीं है। सड़कें भी सिंगल हैं। इससे जाम की समस्या आम हो जाती है।
-शहर का पर्यटन कारोबार से नहीं जुड़ा है। इस वजह से कारोबार स्थानीय लोगों पर ही निर्भर हो गया है।
-राजनीतिक खींचतान में सिरमौर को मिले कई संस्थान दूसरे जिलों को शिफ्ट किए गए। यहां नए संस्थान खोलने को कदम उठाए जाने चाहिए।
- कारोबारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए कोई प्रबंधन नहीं हैं। कारोबारियों के लिए भी बीमा जैसी पॉलिसी बनाई जानी चाहिए।
-बंदरों की समस्या सबसे विकराल है। लोगों का चलना फिरना तक मुश्किल हो गया है। बंदर दुकानों से तक सामान उठाकर ले जाते हैं।

हम क्यों करें दुकानें बंद
कारोबारियों का कहना है कि जब भी कोई आंदोलन हो तो सबसे पहले बाजार बंद करने को कहा जाता है। इसका सबसे अधिक नुकसान कारोबारियों को उठाना पड़ता है। आखिर हर बार हम बाजार बंद क्यों करें ?
क्या कहा नाहन के कारोबारियों ने----
1. दुकानदार कुलदीप बंसल का कहना है कि नाहन शहर का कारोबार लगातार घट रहा है। कॉलेज शहर से बाहर चला गया है। इस वजह से यहां के कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ा है। शहर में खाली पड़ी फाउंडरी की जमीन पर भी कॉलेज खुल सकता था। यहां खुले संस्थानों को शिफ्ट करने की बजाय यहां नए संस्थान आने चाहिए थे।
2. विकास अग्रवाल ने कहा कि सरकार चाहे किसी की भी रही हो, किसी ने कारोबारियों की सुध नहीं ली। कारोबारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए कोई नीति सरकार ने नहीं बनाई है। यदि दुकानदार को कुछ हो जाए तो परिवार सड़क पर आ जाता है। सरकार को कारोबारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए पेंशन नीति या बीमा योजना बनाई जानी चाहिए। जीएसटी से छोटे कारोबारियों का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।
3. गोपाल ने कहा कि आजादी के पहले से नाहन में फाउंडरी चलती थी। हजारों लोग यहां नौकरी करते थे। बाजार में कारोबार भी अच्छा था। लोग बाहर से यहां कारोबार करने आते थे लेकिन, आज नौबत यह यह आ गई है कि यहां का कारोबारी पलायन करने की सोच रहा है। कभी राज्यभर में नंबर एक माना जाने वाला नाहन अब 11वें पायदान पर है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है। क्यों यहां से आईटीबीपी, स्टील प्लांट जैसे प्रोजेक्ट शिफ्ट हुए। नए संस्थान लाने की बजाय कॉलेज जैसे संस्थान को भी शहर से बाहर बनाया गया। जबकि यहां फाउंडरी की कई बीघा जमीन खाली पड़ी है।
4. दुकानदार राजेश कुमार का कहना है कि नाहन का कारोबार यहीं की स्थानीय आबादी पर निर्भर है। बाहरी राज्यों से कारोबार बढ़ाने के लिए यहां उद्योग धंधे स्थापित होने चाहिए। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब का फायदा नाहन की अपेक्षा हरियाणा राज्य के नारायणगढ़ को अधिक है। कभी तालाबों के शहर रहे इस नाहन में पर्यटन को बढ़ावा देने की जरूरत है।
5. निशा अग्रवाल कहती हैं कि शहर को विकसित करने के लिए शहर का दायरा बढ़ाने के साथ ही यहां नए संस्थान खुलने चाहिए। सुकेती के फोसिल पार्क को पर्यटन के रूप में विकसित कर कारोबार को बढ़ाया जा सकता है। हेरिटेज टूरिज्म की दिशा में भी कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही ट्रांसपोर्टेशन की पर्याप्त सुविधा जुटाई जाए।
6. अशोक सैणी ने कहा कि राजनीतिक खींचतान में कारोबारी पिस रहे हैं। कॉलेज फाउंडरी में भी बनाया जा सकता था। लेकिन, इसे बाहर शिफ्ट किया गया। पुराने अस्पताल को खत्म कर वहां मेडिकल कॉलेज कर दिया। इससे आम जनता भी परेशान हो रही है। पार्किंग की सुविधा बढ़ाने के साथ ही अब सड़कों का विस्तार भी जरूरी हो गया है।
7. प्रेम पाल महेंदू ने कहा कि शहर में बंदरों की समस्या बहुत अधिक है। इस समस्या के समाधान के लिए किसी भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाए। लोगों के घर ही नहीं दुकानों से भी बंदर सामान उठाकर ले जा रहे हैं। इसकी समस्या शहर में लगे कूड़ेदान हैं। इसकी व्यवस्था को सुधारना चाहिए।
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8. शबाना सैयद के मुताबिक शहर का कारोबार काफी हद तक प्रभावित हुआ है। साल-दर-साल कारोबार में कमी दर्ज हो रही है। यहां पर क्राफ्ट विलेज बनाने की योजना विचाराधीन है। इसे जल्द अमलीजामा पहनाया जाना चाहिए।
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