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किस वस्तु पर कितना जीएसटी पता ही नहीं

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जीएसटी - फोटो : SOCIAL MEDIA
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संजय गुप्ता
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कालाअंब (सिरमौर)।
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में महंगाई के चलते स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रवासी लोगों को भी जीवनयापन करना मुश्किल हो गया है। जीएसटी लागू होने के बाद खुली खुदरा रोजमर्रा की कुछ वस्तुओं पर पहले की अपेक्षा टैक्स कम हुआ है, या फिर उनको टैक्स फ्री रखा गया है लेकिन दुकानों पर रेट ज्यों के त्यों ही स्थिर हैं। कुछ चीजों के रेट पहले से ज्यादा हो गए हैं। ऐसा अंदेशा है कि दुकानदार जीएसटी की आड़ में ग्राहकों से ठगी भी करने में लगे हैं।

क्षेत्र के मनीष, मनोज, रघुवीर, कमलेश, महिंद्र, सुरेश व धर्मपाल ने बताया कि रसोई घर में प्रयोग होने वाली खाद्य सामग्री के रेट कम होने के बजाय पहले की अपेक्षा और बढ़ गए हैं। जबकि कहा ये जाता रहा था कि जीएसटी लागू होने के बाद खाद्य सामग्री के दाम कम हो जाएंगे। दुकानदार से कीमत ज्यादा वसूलने पर जब पूछा जाता है तो दुकानदार का जवाब होता है कि जीएसटी की वजह से रेट बढ़े हैं।
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लोगों ने बताया कि जीएसटी के बारे में जनता को यही पता नहीं है कि किन-किन चीजों पर कितनी जीएसटी लागू हुई है। इसी बात का फायदा दुकानदार उठा रहे हैं। कुछ खाद्य सामग्री में सरसों तेल पहले 100-105 रुपये प्रतिलीटर पैक मिलता था जो कि अब 130 रुपये मिल रहा है। इसी प्रकार जो चावल खुला 20 से 25 रुपये प्रतिकिलो मिल रहा था वो भी 30 से 35 रुपये मिल रहा है।

रिफाइंड तेल 70 रुपये/लीटर, पामोलीन ऑयल 63-65 रुपये/लीटर था जो जीएसटी के बाद 10 से 15 रुपये और महंगा हो गया है। इसी प्रकार अन्य चीजों के दाम भी आसमान छू रहे हैं। जीएसटी की वजह से दाम बढ़े या दुकानदारों की मनमानी से बढ़े, वजह जो भी हो भुगतना जनता को पड़ रहा है। घरेलू वस्तुओं के दामों में उछाल आने से जीवनयापन करना कठिन हो गया है।
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उधर, करियाना वस्तुओं के डिस्ट्रीब्यूटर राकेश गुप्ता ने बताया कि जीएसटी के दायरे में किसी भी वस्तु पर एक समान टैक्स नहीं है। अलग-अलग वस्तुओं पर अलग-अलग टैक्स लगाया गया है। लिहाजा, कुछ वस्तुओं के दाम बढ़े तो कुछ के घटे भी हैं। किस वस्तु पर कितना जीएसटी लगा है ये याद रखना बड़ा मुश्किल काम है। करियाना की एक दो वस्तुएं तो हैं नहीं, दर्जनों वस्तुएं हैं। सब पर जीएसटी विभिन्न है।
 
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