जनजातीय घोषित करने की कवायद आगे बढ़ने से जगी आस
सैनधार और धारटीधार की 16 पंचायतों ने भी मांगा जनजातीय दर्जा
अमर उजाला ब्यूरो
ददाहू (सिरमौर)। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ़ इंडिया द्वारा गिरिपार क्षेत्र की 127 पंचायतों को जनजातीय घोषित करने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ा देने से जहां गिरिपार क्षेत्र में खुशी का माहौल है। वहीं, दूसरी ओर रेणुका विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी सैनधार व धारटीधार की 16 पंचायतों में भी जनजातीय दर्जे को लेकर धुंधली आस जाग उठी है।
यह अलग बात है कि इन 16 पंचायतों को अभी जनजातीय दर्जा मिलने की कवायद से बाहर रखा गया है लेकिन इन क्षेत्रों के लोग पिछले लंबे समय से संघर्ष का रास्ता अपनाए हुए हैं। लोग सैनधार व धारटीधार की इन 16 पंचायतों को गिरिपार क्षेत्र की पंचायतों की भांति ही जनजातीय क्षेत्र का दर्जा दिए जाने की मांग में शामिल करने की मांग उठा रहे हैं।
इस मांग को लेकर गत वर्ष 2016 में 27 सितंबर को क्षेत्र का एक जनप्रतिनिधिमंडल पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से भी मिला था। जबकि इस वर्ष 3 मई को प्रतिनिधिमंडल ने रेणुका पहुंचे जनजातीय मंत्री जुएल ओराम से सांसद वीरेंद्र कश्यप की अगुवाई में भेंट की थी। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने धारटीधार व सैनधार की 16 पंचायतों को भी जनजातीय दर्जा देने की मांग उठाई थी।
उल्लेखनीय है कि गिरिपार स्थित रेणुका विधानसभा क्षेत्र की 57 में से 41 पंचायतों को जनजातीय क्षेत्र में शामिल किया जाना प्रस्तावित था लेकिन इन 16 पंचायतों को जनजातीय के दायरे में नहीं लाया जा रहा है लेकिन अब गिरिपार क्षेत्र की 127 पंचायतों के पक्ष में संतोषजनक रिपोर्ट सामने आने से इन 16 पंचायतों को भी जनजातीय दर्जा मिलने की आस बंध गई है।
धारटीधार क्षेत्र की बिरला पंचायत के प्रधान सुनील शर्मा, कांडो कांसर पंचायत प्रधान रीता देवी, ददाहू पंचायत प्रधान शकुंतला देवी, कोटला मोलर पंचायत प्रधान रामदत्त व महीपुर पंचायत प्रधान सतपाल मान ने कहा कि गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय घोषित किए जाने को लेकर संतोषजनक रिपोर्ट मिलना एक बड़ी उपलब्धि है। ऐसे में इस कवायद में सैनधार व धारटीधार की 16 पंचायतों को भी शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि यह क्षेत्र भी गिरिपार क्षेत्र में आता है तथा यहां का रहन-सहन, खान-पान व संस्कृति भी गिरिपार क्षेत्र की तरह ही है।
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--योगेंद्र अग्रवाल-- तन्हा