नाहन (सिरमौर)।
जनपद सिरमौर की सड़कों पर भी मौत का सफर जारी है। भाग्य रेखाएं ही कई परिवारों का भाग्य बिगाड़ चुकी हैं। बावजूद इसके भी इन जीवन रेखाओं को सुधारने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। अभी तक जिले में कई ऐसी सड़कें हैं जहां न तो क्रैश बैरियर लगे हैं और न ही पैरापिट्स।
हालांकि, सिरमौर के निजी स्कूलों की बसों में ओवरलोडिंग या नियम तोड़ने के मामले सामने नहीं आए हैं लेकिन निजी गाड़ियों में स्कूली बच्चों को जरूर ढोया जा रहा है। परिवहन विभाग ने भी कुछ अरसे पहले ऐसे दो-तीन मामले पकड़े हैं जिन्हें भारी जुर्माना ठोका गया है।
उधर, कई सड़कों पर क्रैश बैरियर की जगह ड्रम मिट्टी में गाड़कर इतिश्री की गई है। उबड़-खाबड़ व गड्ढों से भरी सड़कों पर जान जोखिम में बनी हुई है। सिरमौर के राजगढ़, शिलाई, नौहराधार, बोगधार, संगड़ाह, रोनहाट, बेचड़ का बाग, बनेठी, सतौन, चांदनी, कफोटा, आंजभोज, हरिपुधार आदि दुर्गम ग्रामीणों क्षेत्रों की ओर जाने वाली सड़कें खस्ताहाल होने के साथ-साथ पैरापिट व क्रैश बैरियरों की कमी से जूझ रही हैं। सिरमौर में 3070 किलोमीटर सड़कों का जाल बिछा है। इसमें से 1617 किलोमीटर सड़कों की टारिंग हुई है जबकि, 1453 किलोमीटर सड़कें कच्ची हैं।
शहर की बसों के इमरजेंसी डोर खुलवाए
नाहन शहर में ‘अमर उजाला’ की टीम ने कई निजी बसों के इमरजेंसी डोर चेक किए। शहर की सरकारी आईटीआई के समीप टीम ने कई बसों में ओवरलोडिंग को जांचा। सुखद बात रही कि किसी भी बस में ओवरलोडिंग नहीं थी और इमरजेंसी डोर भी समय पर खुल गए। जिला में 70 स्कूली बसें पंजीकृत हैं जिन्हें बच्चों को स्कूल व घर छोड़ने की परमिशन है। आरटीओ सुनील शर्मा ने कहा कि नियमों का कढ़ाई से पालन हो रहा है। इसके बिना गाड़ी की पासिंग नहीं की जाती। समय-समय पर चेकिंग भी की जा रही है।
हर साल बजट का प्रावधान-
सड़कों को सुधारने के लिए विभाग के पास हर साल बजट का प्रावधान होता है। कई ब्लैक स्पॉट पर क्रैश बैरियर लगाए जा चुके हैं। पैरापिट लगाकर भी विभाग हादसे रोकने का प्रयास कर रहा है। - एसई, एनके वशिष्ठ, लोक निर्माण विभाग