संसदीय क्षेत्र शिमला से आज तक कोई सांसद नहीं रहा। 43 वर्ष पहले नाहन के सलाणी कटोला गांव से प्रताप सिंह कांग्रेस टिकट से चुनाव जीते थे और इंदिरा गांधी सरकार में सांसद रहे।
वर्ष 1999 एवं 2004 में क्रमश: हिविकां एवं कांग्रेस से सांसद सुने गए डा. कर्नल धनीराम शांडिल शिमला-सोलन की सीमा बशील गांव से हैं, जो सोलन निर्वाचन क्षेत्र में पड़ती है।
वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पच्छाद के पूर्व विधायक गंगूराम मुसाफिर को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन तत्कालीन हिविकां प्रत्याशी धनीराम शांडिल ने उन्हें पराजित किया था।
रोचक बात यह भी है कि सिर्फ तीन बार गैर कांग्रेसी सांसद 1977 में बालकराम, 1999 में धनीराम शांडिल एवं 2009 में भाजपा से वीरेंद्र कश्यप ही चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे।
अन्य सभी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवारों के हाथ बाजी लगी। दिवंगत पूर्व सांसद केडी सुल्तानपुरी ने 1980 से 1998 के बीच लगातार छह बार लोकसभा चुनाव जीता।
वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी एचएन कश्यप को धनीराम शांडिल ने पराजित किया था। 2009 के लोकसभा चुनाव में वीरेंद्र कश्यप को 210946 मत पड़े थे। उन्होंने धनीराम शांडिल (183619) को मात दी थी।
बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी सोमनाथ को वर्ष 2004 में जहां 114471 मत मिले थे, वहीं 2009 के चुनाव में उनके खाते में मात्र 8160 मत गए। इस बार कांग्रेस रोहडू क्षेत्र के विधायक मोहन ब्राक्टा पर दांव खेलने का मन बना रही है।
अब देखना है कि कांग्रेस की ओर से पहली बार शिमला से प्रत्याशी बनने का कितना लाभ पार्टी ले पाती है। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अजय सोलंकी ने कहा कि पार्टी जिसे भी प्रत्याशी बनाएगी, उसे जीत दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।