न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी) विभूति बहुगुणा ने मामले को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए प्रतिवादी विनोद कुमार को पत्नी को 5,000 रुपये प्रति माह और उसके दोनों बच्चों को 2,000 रुपये प्रति माह (कुल 9,000 रुपये प्रति माह) की राशि याचिका दायर करने की तिथि से मुख्य याचिका के अंतिम निपटारे तक देने के आदेश दिए हैं। साथ ही प्रतिवादी पर अगले आदेश तक अपनी संपत्ति हस्तांतरित करने पर रोक लगाई है। इसके अलावा राजस्व अधिकारी को प्रतिवादी से संबंधित भूमि के स्वामित्व, कब्जे और अन्य प्रविष्टियां करने के भी निर्देश दिए हैं।
आदेश दिए हैं कि 4 सितंबर तक प्रतिवादी की संपत्ति के विवरण की अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मानसिक और शारीरिक शोषण के आरोपों को अभी साबित किया जाना बाकी है, लेकिन न्यायालय इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकता कि मुख्य याचिका के निपटारे में काफी समय लगेगा। ऐसे में प्रतिवादी कानूनी और नैतिक रूप से पत्नी और नाबालिग बेटियों का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य है और किसी भी परिस्थिति में वह अपने दायित्व से बच नहीं सकता।