फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिमला: हाईकोर्ट ने कहा- विवाह का ढोंग कर महिला को प्रताड़ित किया तो 498-ए में चलेगा मुकदमा

Tue, 22 Sep 2026 06:45 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आईपीसी की धारा 498-ए (विवाहित महिला के साथ क्रूरता) के तहत के तहत पति शब्द का अर्थ केवल कानूनी रूप से वैध शादी तक ही सीमित नहीं है। 
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आईपीसी की धारा 498-ए (विवाहित महिला के साथ क्रूरता) के तहत के तहत पति शब्द का अर्थ केवल कानूनी रूप से वैध शादी तक ही सीमित नहीं है। मामला चलाने के लिए केवल कानूनी रूप से वैध विवाह का होना अनिवार्य नहीं है। यदि कोई व्यक्ति खुद को पति बताकर या विवाह का ढोंग करके किसी महिला के साथ रहता है और उससे शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है, तो उसके खिलाफ भी धारा 498-ए के तहत आपराधिक कार्रवाई चलाई जा सकती है। न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

याचिकाकर्ता के खिलाफ महिला पुलिस थाना नाहन में वर्ष 2021 में धारा 498-ए के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। पीड़िता का आरोप था कि दोनों की शादी जनवरी 2017 में हिंदू रीति-रिवाजों से नाहन के एक मंदिर में हुई थी। दोनों की यह दूसरी शादी थी। पीड़िता ने आरोप लगाया कि शादी के बाद उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया, उसका स्त्रीधन रख लिया गया और कथित तौर पर उसका जबरन गर्भपात भी कराया गया। याचिकाकर्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत हाईकोर्ट का रुख किया और इस आधार पर एफआईआर रद्द करने की मांग की कि दोनों के बीच कोई वैध विवाह नहीं हुआ था, इसलिए धारा 498-ए लागू ही नहीं होती। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी महिला को वैवाहिक प्रताड़ना देने के बाद इस तकनीकी आधार के पीछे नहीं छिप सकता कि उनकी शादी कानूनी रूप से वैध नहीं थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें