हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले में बैचलर ऑफ वेटरनेरी साइंस एंड एनिमल हसबैंड्री में दाखिले के लिए नीट-यूजी की मेरिट को अनिवार्य बनाने वाले आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने मंडी की निजी अभिलाषी यूनिवर्सिटी को अपनी खुद की प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी है। छात्रों के शैक्षणिक सत्र को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अभिलाषी यूनिवर्सिटी को अगले 10 दिनों के भीतर अपनी कॉमन एंट्रेंस परीक्षा आयोजित करने की छूट दी गई है। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद यूनिवर्सिटी को 14 दिनों के भीतर प्रथम, द्वितीय और मॉप-अप राउंड की काउंसिलिंग पूरी करनी होगी। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि प्रवेश की यह संपूर्ण प्रक्रिया 30 सितंबर से पहले अनिवार्य रूप से संपन्न कर ली जाए।
यह विवाद वेटरनेरी काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से जारी किए गए पत्रों और सार्वजनिक सूचनाओं के बाद शुरू हुआ था। काउंसिल ने राज्य सरकार और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया था कि वेटरनेरी कॉलेजों में दाखिले केवल नीट-यूजी की मेरिट लिस्ट और सेंट्रलाइज्ड काउंसिलिंग के माध्यम से ही किए जाएं। अभिलाषी यूनिवर्सिटी ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी। यूनिवर्सिटी का तर्क था कि वेटरनेरी काउंसिल के नियमों के अनुसार यदि राज्य या काउंसिल कोई केंद्रीय परीक्षा आयोजित नहीं कर रही है, तो विश्वविद्यालय को अपनी प्रवेश परीक्षा के जरिए 80 सीटों पर दाखिला करने का कानूनी अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मिनिमम स्टैंडर्ड्स ऑफ वेटरनरी एजुकेशन रेगुलेशन, 2016 के नियम 7(1) में प्रवेश परीक्षा का स्पष्ट प्रावधान है।