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Gudiya Rape And Murder Case: गुड़िया की मां ने फिर से जांच की लगाई है गुहार, हाईकोर्ट में जल्द होगी सुनवाई

Mon, 27 Jan 2025 06:03 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला

सार

गुड़िया की माता की ओर से हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में मामले में फिर से जांच की गुहार लगाई गई है। याचिकाकर्ता की ओर से जो अर्जी हाईकोर्ट में दायर की गई है, उस पर छुटि्टयां खत्म होने के बाद तुरंत सुनवाई होगी।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में गुड़िया की माता की ओर से मामले में फिर से जांच की गुहार लगाई गई है। इसके लिए अदालत में एक अर्जी दायर की गई है, जिसमें इस मामले को जल्द सुनने की गुहार लगाई गई है।

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गुड़िया की मां की ओर से मार्च 2022 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसे अदालत ने एडमिट कर दिया। इस याचिका में जांच करने वाली एजेंसियों पर सवाल उठाए गए हैं और इस पूरे मामले की फिर से जांच करने की गुहार लगाई है।

आरोप लगाए गए हैं कि घटना के हफ्ते बाद एसआईटी गठित की गई थी और उसके 10-15 दिनों के बाद सीबीआई ने जांच के नमूने इकट्ठा किए। तब तक पीड़िता की बॉडी को भी जला दिया गया। बाद में कोटखाई पुलिस स्टेशन को भी जला दिया गया, जिसमें गुड़िया रेप व हत्याकांड से जुड़ा सारा रिकॉर्ड रखा गया था। याचिकाकर्ता की ओर से जो अर्जी हाईकोर्ट में दायर की गई है, उस पर छुटि्टयां खत्म होने के बाद तुरंत सुनवाई होगी।
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पुलिस वालों को ठीक हुआ, पर नहीं मिला गुड़िया को न्याय : गुड़िया की मां
सीबीआई जांच से गुड़िया की मां संतुष्ट नहीं है। गुड़िया की मां ने कहा कि पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ तो ठीक हुआ, पर गुड़िया को न्याय नहीं मिला है। गुड़िया की मां ने बताया कि बेटी की मौत के बाद पुलिस ने तफ्तीश ठीक से नहीं की तो उनको तो जेल ही जाना था। बेकसूर को थाने में जबरन आरोप कबूल करने के लिए मारा-पीटा गया, इसलिए पुलिस को उसका खमियाजा भुगतना पड़ा है। गुड़िया की माता ने बताया कि बेटी के गुनहगार अभी भी खुले में घूम रहे हैं। गुड़िया को अभी तक इंसाफ नहीं मिला है और उसके हत्यारे आज भी घूम रहे हैं। 

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क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि शिमला जिले के कोटखाई में 4 जुलाई 2017 को लापता हुई 16 वर्षीय छात्रा का शव कोटखाई के तांदी के जंगल में निर्वस्त्र मिला था। मामले की जांच के लिए शिमला के तत्कालीन आईजी जैदी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की थी, जिसने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक आरोपी नेपाली युवक सूरज की कोटखाई थाने में पुलिस हिरासत के दौरान लॉकअप में मौत हो गई थी। मौत का यह मामला जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई जांच में खुलासा हुआ कि सूरज की मौत पुलिस प्रताड़ना के कारण हुई थी। इसी आधार पर सीबीआई ने आईजी जैदी सहित मामले से जुड़े नौ अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ हत्या की धारा 302, सुबूत खुर्द-बुर्द करने की धारा 201 सहित अन्य कई संगीन धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। वर्ष 2017 में इस मामले को शिमला जिला अदालत से चंडीगढ़ सीबीआई अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया। उसके बाद कई बार सुनवाई हुई और अब कोर्ट ने सजा सुनाई है।
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