नई गाड़ी खरीदे हुए अभी एक साल भी नहीं हुआ था कि इसके बोनट और छत का रंग फीका पड़ने लगा। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने अब इस मामले में वाहन निर्माता कंपनी और डीलर को 40 हजार रुपये हर्जाना भरने का आदेश दिया है। आयोग ने आदेश दिया है कि उपभोक्ता की गाड़ी के बोनट और छत के खराब हुए पेट को ठीक किया जाए। इसके अलावा उपभोक्ता को मानसिक उत्पीड़न के लिए 25,000 रुपये मुआवजा और मुकदमे का खर्च के लिए 15,000 रुपये भी देने होंगे। जुब्बल (शिमला) के रहने वाले संजीव सीहता ने 28 सितंबर 2020 को डीलर से एक जीप खरीदी थी। शिकायतकर्ता के अनुसार खरीद के एक साल के भीतर ही गाड़ी के बोनट और छत का पेंट फीका पड़ने लगा और उस पर पैच दिखने लगे। उपभोक्ता ने डीलर के पास जाकर इसकी शिकायत था की कलेकिन बजाय बहाने बनाने शुरू कर दिए। परेशान होकर उपभोक्ता ने आयोग का दरवाजा खटखटाया। निर्माता कंपनी ने कहा कि यह मामला डीलर और ग्राहक के बीच का है और उनका इससे सीधा संबंध नहीं है। डीलर ने तर्क दिया कि एक तकनीशियन द्वारा की जांच में पाया गया कि पेंट खराब होना किसी बाहरी कारण या रासायनिक प्रभाव के कारण हुआ है जो वारंटी में कवर नहीं होता। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन के पाया करने के बाद आया किसी वारंटी कि कंपनी और डीलर अपने दावे को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत (जैसे तकनीशियन का शपथ पत्र) पेश नहीं कर पाए। अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। आयोग ने कंपनी और डीलर को गाड़ी का बोनट और छत को दोबारा पेंट कर दोष को ठीक करने के आदेश दिया है।