2013 में शिकार के दौरान शरीर में गोली लगने के बाद बुढ़ापे में 100 फीसदी विकलांग हुए शरणदास हुनर से गरीबी को मात दे रहे हैं। मंडी जिले के द्रंग ब्लॉक की पंचायत कजोटधार के शरणदास पहाड़ी पर घर का फायदा उठाकर बुरांश और जड़ी बूटियों का कारोबार कर सैकड़ों को रोजगार भी दे रहे हैं। चलने फिरने में असमर्थ शरणदास के घर के पास इन दिनों पहाड़ी बुरांश के फूलों की महक से गुलजार है। घर के अलावा खुले में पहाड़ी पर फूलों को सुखाया जा रहा है।
शरणदास बताते हैं कि फूल मोवीसेरी, थाची, कदार, बठेड़, बरोट, सराज और परासर आदि पहाड़ी इलाकों से इकट्ठा कर गाड़ियों से यहां लाते हैं। उनकी एक गाड़ी है जबकि तीन अन्य गाड़ी चालकों को रोजगार दिया है। एक गाड़ी में करीब 20 क्विंटल फूल आते हैं। 300 से ज्यादा लोग उन्हें इकट्ठा करते हैं। गांवों में वह 12 रुपये किलो फूल खरीदते हैं। उनके अनुसार आसपास की दर्जनों पंचायतों के बच्चे सीजन में फूल बेचकर ही 10 से 15 हजार रुपये कमा लेते हैं। हजारों लोग और बच्चे सीजन में फूल बेचते हैं।
फूलों को छांटने, देखरेख करने और जूस, पाउडर आदि तैयार करने के लिए 20 युवाओं को घरद्वार स्थायी रोजगार भी दिया है। सीजन में एक टन फूलों का पाउडर जबकि हजारों लीटर जूस तैयार किया जाता है। पाउडर और जूस की पंजाब के अमृतसर और गोवा के होटलों में काफी डिमांड है। जूस 100 रुपये लीटर जबकि पाउडर 500 रुपये किलो बेच रहे हैं।