नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक और कृषि विज्ञान केंद्र चंबा के प्रभारी डॉ. धरमिंदर कुमार ने अन्य वैज्ञानिकों के सहयोग से इस किस्म को तैयार किया है। अनुसंधान कार्य विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र जाच्छ (कांगड़ा) में किया गया। नौणी विवि के निदेशक अनुसंधान डॉ. संजीव चौहान ने बताया कि सोलन अधिराज को विशेष रूप से प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों की परिस्थितियों के अनुरूप उच्च उपज देने वाली और कीट-सहनशील भिंडी किस्म के रूप में विकसित किया है। तीन वर्षों तक चले शोध में विभिन्न स्थानों पर किए गए परीक्षणों में इस किस्म को बेहतर पाया गया। इसमें औसतन 203.74 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज दी, जो प्रचलित तुलना किस्म पी-8 से काफी अधिक है। क्योंकि पी-8 किस्म अभी 153.61 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज दे रही है।
भिंडी की नई किस्म निजी क्षेत्र की हाईब्रिड किस्मों का सस्ता और प्रभावी विकल्प बनेगा। इस किस्म में जहां संक्रमण नहीं लगेगा, वहीं फल व तना छेदक कीट की समस्या भी नहीं आएगी। ‘सोलन अधिराज’ का विकास प्रदेश में भिंडी उत्पादन को बढ़ावा देने, कीट-सहनशीलता सुधारने और बीज आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।- प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल, कुलपति नौणी विवि